Friday , February 23 2018

वक़्फ़ जायदादों के तहफ़्फ़ुज़ के लिए राज्यसभा में बिल मंज़ूर

वक़्फ़ जायदादों पर बड़े पैमाने पर नाजायज़ क़ब्ज़ों को रोकने उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा 30 साल तक लीज़ (पट्टा ) पर देते हुए तिजारती एतबार से फ़ाइदाबख्श बनाने के लिए राज्यसभा में आज एक मुसव्वदा क़ानून मंज़ूर करलिया गया।

वक़्फ़ जायदादों पर बड़े पैमाने पर नाजायज़ क़ब्ज़ों को रोकने उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा 30 साल तक लीज़ (पट्टा ) पर देते हुए तिजारती एतबार से फ़ाइदाबख्श बनाने के लिए राज्यसभा में आज एक मुसव्वदा क़ानून मंज़ूर करलिया गया।

वज़ीर-ए-अक़लियती उमूर् के रहमान ख़ान ने कहा कि वक़्फ़ तरमीमी बिल 2010 दरअसल वक़्फ़ जायदादों को मुनासिब अंदाज़ में तिजारती अग़राज़ के लिए इस्तिमाल करते हुए सालाना एक लाख करोड़ रुपय की आमदनी को यक़ीनी बनाने के मक़सद पर मब्नी है और ये रक़म सारी मुस्लिम बिरादरी की समाजी-ओ-मआशी तरक़्क़ी के लिए काफ़ी होगी।

इस बिल के ज़रिये क़ानून वक़्फ़ 1995 में तबदीली लाते हुए वक़्फ़ इदारों को मुस्तहकम बनाने और कारकर्दगी में यकसानियत पैदा करने की तजावीज़ भी शामिल हैं। क़ब्लअज़ीं लोकसभा ने मई 2010 में मंज़ूर कर दिया था ताहम 27अगस्त 2010 को राज्यसभा में पेशकशी के बाद बाअज़ तरामीम पर मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड और दीगर मुस्लिम तंज़ीमों के एतराज़ पर इस बिल को सिलेक्ट कमेटी से रुजू कर दिया गया था। मुसव्वदा क़ानून में मुख़्तलिफ़ तरामीम करनेवाली मुशतर्का पारलीमानी कमेटी और सिलेक्ट कमेटी की मसाई की सताइश करते हुए के रहमान ख़ान ने कहा कि तरमीमी बिल के तहत मर्कज़ी हुकूमत को मुख़्तलिफ़ रियासती वक़्फ़ बोर्ड को हिदायत करने के इख़्तेयारात हासिल हो जाएंगे और रियासती वक़्फ़ बोर्ड पर मर्कज़ी हिदायात पर अमल आवरी लाज़िमी हो जाएगी। अगर रियासती वक़्फ़ बोर्डस किसी हिदायत पर एतराज़ करते हैं तो उन एतराज़ात को वक़्फ़ ट्रब्यूनल से रुजू किया जा सकता है। ये तरमीमी बिल राज्यसभा में मंज़ूरी की तौसीक़ के लिए अब दुबारा लोकसभा में पेश किया जाएगा।

रहमान ख़ान ने एतराफ़ किया कि मौजूदा क़ानून के तहत मुख़्तलिफ़ रियासती बोर्ड सही अंदाज़ में काम नहीं कररहे थे। उन्होंने कहा कि वक़्फ़ जायदाओं का सर्वे एहमीयत का हामिल है और अब अंदरून एक साल तमाम मुक़ामात पर मौक़ूफ़ा जायदादों का सर्वे मुकम्मल करलिया जाएगा। इस मक़सद के लिए रियासती हुकूमतें सुरवीरस के तक़र्रुत करेंगी। रहमान ख़ान ने कहा कि मुल्क भर में चार लाख मौक़ूफ़ा जायदादें हैं और अगर उन्हें मुनासिब तौर पर तरक़्क़ी दी जाती है तो उन से फ़िलहाल 6000 करोड़ रुपये की आमदनी होरही है लेकिन ये आमदनी एक लाख करोड़ सालाना भी होसकती है और ये ख़तीर रक़म मुस्लमानों की समाजी-ओ-मआशी तरक़्क़ी के इक़दामात शुरू करने के लिए काफ़ी हो जाएगी।

वज़ीर ने कहा कि अब वक़्फ़ बोर्ड के पास नहीं बल्कि हुकूमत के पास तमाम मौक़ूफ़ा जायदादों के रेकॉर्ड्स रखे जाऐंगे। उन्होंने कहा कि वक़्फ़ जायदादों पर क़ब्ज़ा करने वालों को अब दो साल की सज़ा ए क़ैद होगी। क़ौमी वक़्फ़ डेवलपमंट कारपोरेशन की तरफ़ से औकाफ़ी जायदादों के फ़रोग़ के लिए 500 करोड़ रुपये का कॉर्प्स क़ायम किया जाएगा ।औकाफ़ी जाएदादों को लीज़ पर देने के मसला पर उन्हों ने कहा कि मर्कज़ी हुकूमत मुद्दत के बारे में यकसाँ क़वाइद वज़ा की है और मौजूदा तीन साल के बजाय अब ज़्यादा से ज़्यादा 30साल तक किसी औकाफ़ी जायदाद को लीज़ पर दिया जा सकता है।

बी जे पी के मुख़तार अब्बास नक़वी ने बेहस में हिस्सा लेते हुए इस दफ़ा पर एतराज़ किया जिस में कहा गया है कि किसी सदर नशीन वक़्फ़ बोर्ड के तक़र्रुर के अंदरून एक साल उनके ख़िलाफ़ तहरीक अदमे इअतिमाद पेश नहीं की जा सकती।

कांग्रेस के सैफुद्दीन सोज़ ने कहा कि अगरचे ये क़ानून जामे है इस के बावजूद मज़ीद चंद तरमीमात करने की गुंजाइश है। बिलख़सूस सरकारी-ओ-ख़ानगी फ़रीक़ों के बशमोल नाजायज़ क़ब्ज़ा करने वालों की तशरीह करने की ज़रूरत है।

बी एस पी के सलीम अंसारी ने कहा कि मुल्क में सब से ज़्यादा औकाफ़ी जायदादें उत्तरप्रदेश में हैं जिसके बावजूद एस पी हुकूमत रियासती वक़्फ़ बोर्ड के तमाम इख़्तयारात को सल्ब कर चुकी है। अंसारी ने उमूर् वक़्फ़ बोर्ड के इंतिज़ाम के लिए एक अलाहिदा शोबा क़ायम करने की हिमायत की क्योंकि बाक़ौल उनके कई औकाफ़ी जायदादें रियासती हुकूमतों के ज़ेर-ए-इस्तेमाल हैं।

जे डी (यू) के अली अनवर ने इस बिल की हिमायत की और सुख गुरुद्वारा कमेटियों के ख़ुतूत पर वक़्फ़ बोर्ड के अरकान को मुंतख़ब करने का तरीक़ा राइज करने की तजवीज़ पेश की।

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