Saturday , January 20 2018

वक़्फ़ बोर्ड्स की तशकील के साथ ही सियासी मुदाख़िलत का आग़ाज़

आंध्र प्रदेश वक़्फ़ बोर्ड की तक़सीम और तेलंगाना वक़्फ़ बोर्ड की तशकील के साथ ही औक़ाफ़ी उमूर में सियासी मुदाख़िलत का आग़ाज़ हो चुका है और फ़र्ज़शनास और उसूल पसंद ओहदेदारों को निशाना बनाया जा रहा है।

तेलंगाना वक़्फ़ बोर्ड की तशकील के साथ ही मुक़ामी सियासी जमात और वक़्फ़ लॉबी के दबाव के तहत तेलंगाना हुकूमत ने गुज़िश्ता एक साल से ख़िदमात अंजाम देने वाले ओहदेदार मजाज़ एम जे अकबर को अचानक ज़िम्मेदारी से सुबूकदोश कर दिया।

उनकी अचानक तबदीली और सेक्रेट्री अक़लीयती बहबूद को कम रुत्बा की ज़ाइद ज़िम्मेदारी से महकमा अक़लीयती बहबूद और वक़्फ़ बोर्ड के ओहदेदार और मुलाज़मीन हैरत में हैं। बताया जाता है कि मुक़ामी सियासी जमात ने उनकी मर्ज़ी के मुताबिक़ फैसले करने से इनकार पर ओहदेदार मजाज़ की तबदीली का हुकूमत पर दबाव बनाया।

अब उनका अगला निशाना मौजूदा चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफीसर हैं जिनकी ख़िदमात महकमा माल से बतौरे ख़ास हासिल की गई हैं। मज़कूरा दोनों ओहदेदारों ने औक़ाफ़ी उमूर के सिलसिले में कोई समझौता नहीं किया और ना ही सियासी दबाव के आगे ख़ुद को झुकाया।

यही वजह है कि मुक़ामी जमात ने हुकूमत पर असर अंदाज़ होते हुए तेलंगाना वक़्फ़ बोर्ड की तशकील के साथ ही ओहदेदार मजाज़ को सुबूकदोश कर दिया। दिलचस्प बात तो ये है कि सेक्रेट्री अक़लीयती बहबूद सैयद उमर जलील ख़ुद भी हुकूमत के इस फैसले से हैरत में हैं जिसका इज़हार उन्होंने आज मीडिया के नुमाइंदों से बात चीत के दौरान किया।

इस से साफ़ ज़ाहिर है कि हुकूमत पर ज़बरदस्त दबाव है। अगर यही सूरते हाल रही तो वक़्फ़ बोर्ड में कोई भी इमानदार और दयानतदार ओहदेदार ख़िदमात अंजाम देने के लिए राज़ी नहीं होगा।

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