Saturday , December 16 2017

वज़ीरए अक़लीयती बहबूद अहमद उल्लाह के ख़िलाफ़ एहतेजाज

रियास्ती अक़ल्लीयती मालीयाती कारपोरेशन में हुए 56 करोड़ रुपय का तग़ल्लुब(ग़बन) पर हुकूमत आंध्र प्रदेश ने ना सिर्फ जामि तहक़ीक़ात का हुक्म दिया है बल्के ख़ातियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी शुरू करदी है।

रियास्ती अक़ल्लीयती मालीयाती कारपोरेशन में हुए 56 करोड़ रुपय का तग़ल्लुब(ग़बन) पर हुकूमत आंध्र प्रदेश ने ना सिर्फ जामि तहक़ीक़ात का हुक्म दिया है बल्के ख़ातियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी शुरू करदी है।

इस धांदली की जितनी भी मज़म्मत की जाय, कम है ताहम इस मआमले में गै़रज़रूरी तौर पर वज़ीरए अक़लीयती बहबूद जनाब अहमद उल्लाह को घसीटना सस्ती शौहरत हासिल करने का ज़रीया है।

सीनीयर कांग्रेस क़ाइद(लीडर) जनाब शाहिद पैरां ने अपने ब्यान में कहा के वज़ीरए अक़लीयती बहबूद जनाब मुहम्मद अहमद उल्लाह एक साफ़-ओ-शफ़्फ़ाफ़ शबिया रखने वाले क़ाइद (लीडर) हैं।

हिज़्बए मुखालिफ़ जमातों के कारकुन(लीडर्स) उन की ख़िदमात को बालाए ताक़ रखते हुए अपनी सयासी मुख़ासमत(दुश्मनि) की बिना पर उन के अलामती पुतलों को नज़र-ए-आतिश(जलाना) रहे हैं जो किसी भी तरह दरुस्त(सही) इक़दाम नहीं है।

जनाब शाहिद पैरां ने इन एहितजाजियों को इंतेबाह(चेतावनी) दिया है के वो अपनी इन हरकात से बाज़ आजाऐं। वज़ीरए अक़लीयती बहबूद को इस मआमेले में बदनाम करना और उन्हें ज़िम्मेदार गर्दानना निहायत ही ग़ैर ज़िम्मा दाराना और मुजरिमाना हरकत है जिसे सिर्फ और सिर्फ वज़ीरए अक़लीयती बहबूद को रुसवा करने से ताबीर किया जा सकता है जिस की जितनी भी मज़म्मत की जाय कम है।

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