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वजीरे आला के इलाके में 1000 क्विंटल का बीज घोटाला

वजीरे आला हेमंत सोरेन के एसेम्बली इलाक़े दुमका में बीज घोटाले के बड़े मामले का खुलासा हुआ है। लाभुकों का फरजी दस्तखत कर 1053 क्विंटल धान बीज के तक़सीम में गड़बड़ी की खबर है। यह अदाद व शुमार सिर्फ पांच ब्लॉकों का है।

वजीरे आला हेमंत सोरेन के एसेम्बली इलाक़े दुमका में बीज घोटाले के बड़े मामले का खुलासा हुआ है। लाभुकों का फरजी दस्तखत कर 1053 क्विंटल धान बीज के तक़सीम में गड़बड़ी की खबर है। यह अदाद व शुमार सिर्फ पांच ब्लॉकों का है।

इन ब्लॉकों में 1549 किसानों के दरमियान बीज का तक़सीम करना था। पर उन्हें बीज दिया ही नहीं गया। कागज (रजिस्टर) में उनके दरमियान बीज तक़सीम किये जाने की बात दिखा दी गयी। दुमका के डीसी ने रियासत के ज़िराअत सेक्रेटरी नितिन मदन कुलकर्णी को इससे मुतल्लिक़ रिपोर्ट भेजी है। साथ ही एजेंसी से तहक़ीक़ात कराने की सिफ़ारिश की है।

अफसरों की भी मिलीभगत

रिपोर्ट में कहा गया है कि किसानों का फरजी दस्तखत कर इस घोटाले को अंजाम दिया गया। कहीं-कहीं पर किसानों को आंशिक बीज दिया गया है, जबकि रजिस्टर में ज्यादा दर्ज किया गया है। सारे मामलों में किसानों के दस्तखत गलत हैं। इसमें ज़ाती अफसरों और लैंपस मुलाज़िमीन भी शामिल हैं। दुमका के डीसी ने पांच ब्लॉकों का तसदीक़ मुतल्लिक़ ब्लॉक डेव्लपमेंट अफसर से कराया, तो सारी गड़बड़ी सामने आ गयी।

कैसे पकड़ में आया मामला

मुखतलिफ़ लैंपस की तरफ से किसानों को फराहम कराये गये बीज की फेहरिस्त तैयार की गयी थी। यह फेहरिस्त माली साल 2013-14 में तक़सीम बीज से मुतल्लिक़ है। डीसी ने इसी फेहरिस्त की बुनियाद पर पर तसदीक़ कराया। फेहरिस्त मुतल्लिक़ बीडीओ को दी गयी। इसके बुनियाद पर बीडीओ गांवों में गये और फेहरिस्त में दर्ज नाम के मुताबिक किसानों से राब्ता किया। किसानों से बातचीत की और उनका बयान लिया, तो पाया कि यहां बीज बंटे ही नहीं हैं।

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