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चीन अपने जुल्मों से उइगर मुस्लिमों की पहचान को मिटाना चाहता है!

चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों के अलावा दूसरे अल्पसंख्यकों के खिलाफ चीनी सरकार की सख्ती कोई नई बात नहीं है। अब रिपोर्ट आई है कि चीन के शिनजियांग में 10 लाख से ज्यादा मुस्लिम लापता हैं। इनके बारे में कहा जा रहा है कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने उन्हें शिविरों में बंद किया हुआ है।

यहां पर उन्हें उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी के विचारों की घुट्टी पिलाई जा रही है। कहा जा रहा है कि उन्हें कथित तौर पर देशभक्त बनाया जा रहा है। चीन चाहता है कि उनकी उइगर पहचान खत्म हो जाए।

चीन इस समय एक लोग और एक राष्ट्र के सिद्धांत पर काम कर रहा है। ऐसे में वह उइगर, उजबेक और दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को अपना निशाना बना रहा है।

चीन ने उइगर मुसलमानों पर नजर रखने के लिए उइगर मुसलमानों के घर के बाहर क्यूआर कोड सिस्टम लगाया जा रहा है. चीन पर यह आरोप ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) नाम के संगठन ने अपनी रिपोर्ट में लगाए हैं।

संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने इन कदमों पर चिंता व्यक्त की है। शिनजियांग में बड़ी संख्या में तुर्की भाषा बोलने वाले उइगर मुस्लिम रहते हैं। यहां आंदोलन हो चुके हैं और चीन की सत्ता इनमें से कई को अलगाववादी मानती है।

अभी आई एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन में सुरक्षा अधिकारी किसी घर में घुसने से पहले घर के दरवाजे पर लगे डिवाइस को मोबाइल से स्कैन करते हैं। रिपोर्ट बनाने वाले एक शख्स का इस नई योजना के बारे में कहना है कि, ‘चीनी सरकार मानव अधिकारों पर हमला कर रही है. यह पिछले कई दशकों से अनदेखा किया जा रहा है।

दूसरी तरफ चीन का प्रशासन इसे सिरे से खारिज कर रहा है। उसका कहना है कि उन डिवाइस की मदद से जनगणना नियंत्रण और घर-घर दी जानेवाली सर्विस में मदद मिलती है।

शिनजियांग के आर्टुश में रहने वाले 39 वर्षीय फरखाद ऐसे शख्स हैं, जिन्हें पता हीं नहीं है कि उनकी पत्नी जिंदा है या नहीं। उनकी पत्नी मरियम को स्थानीय पुलिस ने करीब 1 साल पहले मार्च 2017 में हिरासत में लिया था।

शुरुआत में कहा गया कि उसे डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। कुछ महीनों तक उससे मैसेज के जरिए बातचीत होती रही, लेकिन अब वह भी बंद है। जून 2017 के बाद से उन्हें ये पता नहीं है कि उनकी पत्नी जिंदा भी है या नहीं। अब वह अपने तीन बच्चों को खुद ही संभाल रहे हैं।

मरियम चीन में उन 10 लाख अल्पसंख्यकों में से है, जो एक तरह से लापता हैं। इनमें उइगर, कजाक, हुई, उजबेक और दूसरे अल्पसंख्यक शामिल हैं। कहा जा रहा है कि इन लोगों को डिटेंशन कैंप में रखा जा रहा है। जहां उन्हें अपने धर्म को भूलने की प्रैक्टिस कराई जा रही है। चीन में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने अल्पसंख्यकों का बड़ी संख्या में बंदी बनाने की घटना बताया था।

चीन ने इन सभी आरोपों को नकारा है। उसका कहना है कि वह अपने देश की एकता और अखंडता के लिए ऐसा कर रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग का कहना है कि चीन अपने सभी नागरिकों के धार्मिक हितों की रक्षा करता है। सभी प्राचीन समूह अपनी धार्मिक आजादी का पूरा लाभ ले रहे हैं।

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