तसवीरों में : कश्मीर के दशकों लंबे संघर्ष के यतीम बच्चे

तसवीरों में : कश्मीर के दशकों लंबे संघर्ष के यतीम बच्चे
दस वर्षीय इनशा अनंतनाग जिले के डायलगम गांव में श्रीनगर शहर के लगभग 55 किलोमीटर दक्षिण में अपने घर की खिड़की से बाहर दिखती है। इनशा के पिता को 2015 में अनंतनाग शहर में ग्रेनेड हमले में मार गिराया गया था। इनशा कहती है की "कोई भी मेरे पिता की जगह को नहीं भर सकता, भले ही हम गरीब थे, वह हम सभी का ख्याल रखता थे।

कश्मीर : भारतीय-प्रशासित कश्मीर के पांच साल का लड़का सुहाब, दो साल पहले उस त्रासदी से अनजान था जो दोबारा उसके सामने आया। उनके पिता एजाज अहमद थोकर को भारतीय सेना द्वारा मार दिया गया था जब उसके पिता विद्रोही कमांडर बुरहान मुजफ्फर वाणी के विरोध प्रदर्शन के बाद वापस लौट रहे थे। वाणी की मौत के बाद थोर का कश्मीर में पहली हत्या थी। सुहाब की मां असिफा ने कहा “मेरे बेटे को अपने पिता की मृत्यु के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वह यह भी समझने में असमर्थ है की मृत्यु का क्या मतलब है,”। “जब भी वह अपने पिता के बारे में पूछता है, मैं कहता हूं कि वह हज करने के लिए गए हैं। सेव द चिल्ड्रन के अनुसार, भारत-प्रशासित कश्मीर के 200,000 अनाथों बच्चों के लिए के 37 प्रतिशत लड़ाई के परिणामस्वरूप संघर्ष जिम्मेदार है। घाटी में हर जगह अनाथालय दिखाई दे रहे हैं। कश्मीर एक हिमालय क्षेत्र है जिसे भारतीय और पाकिस्तानी नियंत्रण के बीच विभाजित किया गया है, दोनों देशों ने पूर्ण क्षेत्र पर दावा करता है। दोनों देशों ने तीन युद्ध लड़े, जिनमें से दो विशेष रूप से कश्मीर पर थे। भारतीय शासन के खिलाफ एक सशस्त्र विद्रोह 1989 में शुरू हुआ और उसने हजारों की जान ली ।

एक और मामले में 8000 कश्मीरियों को गायब होने के अधीन रखा गया है जिसकी अभी तक पुष्टि नहीं की जा सकी है। विद्रोहियों और भारतीय सेनाओं के बीच भयंकर गोलीबारी लगभग रोजाने की घटना है और बच्चों को अक्सर झेलना पड़ता है। मनोचिकित्सक डॉ अर्शिद हुसैन ने कहा, “अनाथालयों के अंदर बच्चों के लिए जोखिम भरा होता है जहां कई तरह की जोखिम का सामना करना पड़ता है जिसमें दुष्कर्म जैसे मामले भी हैं।” “वे अनाथालयों के चश्मे के माध्यम से दुनिया देखते हैं … इन बच्चों को अपने विस्तारित परिवारों के साथ उठाया जाना चाहिए और सामान्य स्कूलों में नामांकित होना चाहिए।”

दस वर्षीय इनशा अनंतनाग जिले के डायलगम गांव में श्रीनगर शहर के लगभग 55 किलोमीटर दक्षिण में अपने घर की खिड़की से बाहर दिखती है। इनशा के पिता को 2015 में अनंतनाग शहर में ग्रेनेड हमले में मार गिराया गया था। इनशा कहती है की “कोई भी मेरे पिता की जगह को नहीं भर सकता, भले ही हम गरीब थे, वह हम सभी का ख्याल रखता थे।

22 साल के उमर फारूक, श्रीनगर शहर के 44 किमी दक्षिण में, बिजबेहरा शहर में अपने पिता की कब्र पर प्रार्थना करता है। फारूक के पिता, एक विद्रोही के रूप में 1996 में भारतीय सेना के साथ गोलीबारी में मारा गया था। फारूक ने कहा, “मेरी मां ने हमारे जिंदगी और पढ़ाई लिखाई के खर्चों को पूरा करने के लिए दिन-रात काम किया है।”

पुलवामा जिले में एक विद्रोही सेनानी के अंतिम संस्कार में उपस्थित बच्चे ।

शाज़िया के पिता 8000 कश्मीरियों में से हैं, जिन्हें जबरन गायब कर दिया गया है। 16 वर्षीय एक कश्मीरी लड़की ने कहा “मेरे पिता के बिना जीवन अधूरा है। कई बार मुझे उनकी बहुत याद आती है।

बंदी के दौरान अनंतनाग में आजादी के समर्थक भित्तिचित्रों के सामने चलते हुए।


बच्चे एक विद्रोही की मौत होने के बाद अंतिम संस्कार का जुलूस देखते हुए ।

पांच वर्षीय ईद अहिल अपने घर पर फोटो खिंचवाने से बचने के लिए अपना चेहरा ढंकते हुये। उनके पिता जो एक भारतीय सेना के सहायक थे वो पिछले वर्ष एक विद्रोही हमले में मारे गए थे।

सुगरा सर्जन और अजान सर्जन शोपियाँ जिले में अपने घर के अंदर। उनके पिता सर्जन बरकाती को 2016 में कैद किया गया था, उनके विरोधी भारत के भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। उनके कार्यों ने उन्हें उपनाम के तौर पर आजादी चाचा कहा गया ।

दक्षिणी कश्मीर में एक विद्रोही के अंतिम संस्कार के दौरान बच्चों ने भारत विरोधी नारे लगाए।

नौ वर्षीय जोहरा श्रीनगर में अपने घर के अंदर अपने जन्मदिन पर एक तस्वीर के लिए तैयार हैं। उनके पिता एक पुलिस अधिकारी थे जो बंदूकधारियों ने अनंतनाग शहर में दिउटी के दौरान गोली मार दी गयी थी।

सुहाहैब और इफ्फाक अपने घर के कमरे में अंदर बैठे हैं, एक आग के पॉट के आसपास अपने हाथ को गरम कर रहे हैं। लोकप्रिय विद्रोही कमांडर बुरहान वाणी की हत्या के बाद उनके पिता ने पिछले गर्मियों में विरोध प्रदर्शन किया था, जो मरा गया था।

एक बच्चा बुलेट कैशिंग दिखाते हुये जिसने एक गोलीबारी की जगह से इसको इकट्ठा किया था। बच्चे कॉपर स्मेल्टर को इस्तेमाल की गई बुलेट बेचते हैं।

22 साल के उमर फारूक, श्रीनगर शहर के 44 किमी दक्षिण में, बिजबेहरा शहर में अपने पिता की कब्र पर प्रार्थना करता है। फारूक के पिता, एक विद्रोही के रूप में 1996 में भारतीय सेना के साथ गोलीबारी में मारा गया था। फारूक ने कहा, “मेरी मां ने हमारे जिंदगी और पढ़ाई लिखाई के खर्चों को पूरा करने के लिए दिन-रात काम किया है।”

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