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वादी कश्मीर में हड़ताल के ऐलान पर मिला जुला रद्द-ए-अमल

अलैह‌दगी पसंदों ने 1947 में वादी कश्मीर में फ़ौज की तायनाती के ख़िलाफ़ बतौर-ए-एहतजाज हड़ताल का ऐलान किया था। हिन्दुस्तानी फ़ौज पाकिस्तानी हिमायत याफ़ता क़बाइली हमला आवरों के हमले को रोकने के लिए वादी कश्मीर रवाना की गई थी।

अलैह‌दगी पसंदों ने 1947 में वादी कश्मीर में फ़ौज की तायनाती के ख़िलाफ़ बतौर-ए-एहतजाज हड़ताल का ऐलान किया था। हिन्दुस्तानी फ़ौज पाकिस्तानी हिमायत याफ़ता क़बाइली हमला आवरों के हमले को रोकने के लिए वादी कश्मीर रवाना की गई थी।

इस हड़ताल की अपील पर मिला-जुला रद्द-ए-अमल देखा गया। ज़्यादा तर दूकानें और दीगर तिजारती इदारे जैसे पेट्रोल पंप्स और ख़ानगी दफ़ातिर बंद रहे। वादी कश्मीर के बड़े कस्बों और श्रीनगर में हड़ताल का मामूली सा असर देखा गया ताहम हफ़तावारी बाज़ारों पर जो क़लब शहर में मुनाक़िद किए जाते हैं हड़ताल का असर नहीं हुआ।

सरकारी ट्रांसपोर्ट सड़कों से ग़ायब थी। ख़ानगी कारें ऑटोरिक्शा और टैक्सीयाँ हसब-ए-मामूल चलती हुई देखी गई। स्कूलस और कॉलेजस बंद थे। दीगर तालीमी इदारे सालाना इमतिहानात के पेशे नज़र खुले रखे गए थे। सय्यद अली शाह गिलानी की सख़्त गीर हुर्रियत कान्फ्रेंस में हड़ताल की अपील की थी।

हुर्रियत कान्फ्रेंस के सदर मीर वाइज़ उमर फ़ारूक़ और दीगर अलैह‌दगी पसंद ग्रुपस जे के एल एफ़ और दुख़तर मिल्लत की भी हड़ताल को ताईद हासिल थी। अलैह‌दगी पसंद तंज़ीमें हर साल आज ही के दिन 1989 में रियासत में अस्करीयत पसंदी के आग़ाज़ के ख़िलाफ़ भी बतौर-ए‍एहतेजाज हड़ताल किया करते हैं।

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