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वालिद की लाश को गवाह मानकर बेटे ने की शादी

एक बेटा अपनी वालिद की आखिरी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए अपने वालिद की चिता को आग देने से पहले वालिद की लाश को गवाह मानकर अपनी शादी रचा डाली।

एक बेटा अपनी वालिद की आखिरी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए अपने वालिद की चिता को आग देने से पहले वालिद की लाश को गवाह मानकर अपनी शादी रचा डाली।

ज़मीन पर वालिद की लाश पड़ी थी और उसे ही गवाह मानकर दुल्हा और दुल्हन ने सात फेरे ले लिए। उत्तर प्रदेश के मऊ जिला के गांव महुआर बसगितिया मुकीमी महेंद्र और सुनैना ने शादी का जो तरीका अपनाया, वह पूरे इलाके में चर्चा यानी बहस का मौजू बना हुआ है।

लखनऊ विकास प्राधिकरण की खिदमत से छुट्टी लेने के बाद महुआर गांव का मुकीम भोला ने अपनी चार बेटीयों की शादी की। तीन साल पहले एक हादसे में जख्मी होने के बाद पूरी तरह से बिस्तर पकड़ चुके भोला को सिर्फ एक बेटे की शादी की फिक्र थी। वह चाहते थे कि उनके जीते जी उसकी भी शादी हो जाए।

रामकवल की बेटी सुनैना से उनके बेटे की शादी तय भी हो गई। शादी की तारीख 20 जनवरी 2013 पड़ी। अभी भोला अपने सामने बेटे की शादी देखते कि इसके पहले ही उनका इंतेकाल हो गया। महेंद्र ने ठान लिया कि पिता की चिता को आग लगाने के पहले उनकी अंतिम ख्वाहिंश पूरी करेगा। जब यह बात बेटी के घर वाले तक पहुंची और वे भी तैयार हो गए।

फिर पास के संत रविदास मंदिर में पीर को ही दोनों ने भोला की लाश को गवाह मान एक-दूजे को जयमाला पहनाए व उसके सात फेरे लिए। इसके बाद महेंद्र ने वालिद का आखिरी रसूमात किया।

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