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विज्ञापन पर मोदी सरकार ने ख़र्च किए 1500 से 2000 करोड़ -कांग्रेस

आम आदमी पार्टी से प्रचार के पैसे का हिसाब मांगने वाली बीजेपी अब खुद सवालों के घेरे में है । विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री ने पिछले तीन सालों में अपने विज्ञापन पर 1500 से 2000 करोड़ रुपये ख़र्च किए.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य आनंद शर्मा ने कहा कि देश की चरमराती अर्थव्यवस्था के बारे में देश की जनता को सचाई बताने के लिए केंद्र की बीजेपी सरकार को आर्थिक स्थित पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए.

आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार द्वारा भारतीय पीएसयू में हिस्सेदारी बेची जा रही है. उन्होंने कहा कि कोई भी देश अच्छी गुणवत्ता वाले हथियारों का उत्पादन किए बिना अपनी रक्षा नहीं कर सकता.

शर्मा ने कहा कि सांठगांठ वाले पूंजीवाद के लिए रक्षा क्षेत्र के पीएसयू को बंद नहीं किया जा सकता. कांग्रेस भाजपा के इस एजेंडे का विरोध करेगी और पर्दाफ़ाश करेगी.

आनंद शर्मा ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहाकि पीएम मोदी ने हर साल दो करोड़ रोजगार मुहैया कराने का वादा किया था. पिछले तीन साल में 6 करोड़ लोगों को रोज़गार मिलना चाहिए था. सरकार को उन लोगों के नाम प्रकाशित करने चाहिए जिन्हें पिछले तीन साल में रोज़गार मुहैया कराए गए हैं.

शर्मा ने दावा किया कि पिछले तीन साल में किसी को रोज़गार मिले ही नहीं है, बल्कि नोटबंदी के चलते ढाई करोड़ लोगों के रोज़गार छिन गए हैं.

कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र की मांग की है. केंद्र को पिछले 10 साल के जीडीपी के बारे में तुलनात्मक आंकड़े पुरानी और नयी श्रृंखला में जारी करना चाहिए. इससे साबित हो जाएगा कि रोज़गार में तेज़ी नहीं आ रही है जैसा कि दावा किया जा रहा है बल्कि मंदी आ रही है.

शर्मा ने दावा किया कि अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने के लिए प्रधानमंत्री के पास पर्याप्त योजना नहीं है. दुनिया भर के अर्थशास्त्री उन आंकड़ों पर सवाल उठाने लगे हैं जो भाजपा सरकार पेश कर रही है. भाजपा को अपने इस कृत्य के लिए देश से माफ़ी मांगनी चाहिए.

कांग्रेस नेता शर्मा ने दावा किया कि यूपीए के समय राष्ट्रीय निवेश दर 34.8 प्रतिशत थी जो एनडीए के शासन में घटकर 26.9 पर आ गई है. 7 प्रतिशत की गिरावट यह दिखाती है कि नये उद्योग शुरू नहीं हो सके हैं, नई क्षमताएं नहीं पैदा की जा सकी हैं और एक तिहाई क्षमता का उपयोग ही नहीं किया गया.

उन्होंने कहा कि जब यूपीए सत्ता में थी, उस समय कच्चे तेल की क़ीमत 109 डालर प्रति बैरल थी जो अब घटकर 50 डालर प्रति बैरल रह गयी है. इस प्रकार सरकार ने सालाना 100 अरब डालर यानी 6.5 लाख करोड़ रूपए बचाए. शर्मा ने कहा कि पेट्रोल की क़ीमतें लगभग वहीं है तो इन वर्षों में एकत्र पैसे कहां गए.

शर्मा ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार सत्ता में तीन साल पूरे होने का उत्सव मना रही है, जबकि देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है, महंगाई और बेरोज़गारी बढ़ रही है, किसान आत्महत्या बढ़ रही है, आंतरिक सुरक्षा दिन-ब-दिन गंभीर स्थिति में पहुंच रही है, सरकार किस बात का उत्सव मना रही है?

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