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विद्याचरण शुक्ल नहीं रहे

नई दिल्ली, 11 जून - सीनियर कांग्रेसी कायद विद्याचरण शुक्ल नहीं रहे. 25 मई को छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में हुए माओवादी हमले में घायल शुक्ल को तीन गोलियां लगी थीं और उनका गुड़गांव के मेदांता मेडिसिटी अस्पताल में इलाज चल रहा था.

नई दिल्ली, 11 जून – सीनियर कांग्रेसी कायद विद्याचरण शुक्ल नहीं रहे. 25 मई को छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में हुए माओवादी हमले में घायल शुक्ल को तीन गोलियां लगी थीं और उनका गुड़गांव के मेदांता मेडिसिटी अस्पताल में इलाज चल रहा था.

शुक्ल को घायल होने के अगले दिन ही एयर लिफ्ट कर रायपुर से यहां लाया गया था. शुरुआत में शुक्ल की हालत में सुधार हुआ, मगर एक हफ्ते बाद ही यह फिर बिगड़ने लगी.इनफेक्शन के चलते उनके आज़ा (अंग) काम करना बंद करने लगे. डॉक्टरों के मुताबिक मंगल की दोपहर उन्होंने आखरी सांस ली।

विद्याचरण शुक्ल मध्य प्रदेश के पहले चीफ मिनिस्टर रविशंकर शुक्ल के छोटे बेटे थे. वह महज 29 साल की उम्र में महासमुंद से एमपी बने थे और उस वक्त सबसे कम उम्र के एमपी थे. उसके बाद शुक्ल इंदिरा कैबिनेट में कई ओहोदों पर रहे. इमरजेंसी के दौरान इंद्र कुमार गुजराल को हटाकर शुक्ल को ही वाजीरे इतेल्लअत बनाया गया.

25 मई को माओवादियों ने छत्तीसगढ़ में परिवर्तन यात्रा निकाल रहे कांग्रेसियों पर हमला किया था. कांग्रेसी नेता सुकमा में एक रैली से लौट रहे थे, जब उन पर दरभा घाटी में हमला किया गया. इसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सदर नंद कुमार पटेल, पूर्व मंत्री और सलमा जुडूम की तहरीक शुरू करने वाले महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार समेत 27 लोग मारे गए थे. जबकि 31 घायल हुए. घायलों में विद्याचरण शुक्ल के अलावा विधायक कवासी लखमा भी थे.

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