Saturday , September 22 2018

विभिन्न रंग है कुमाऊं की होली का

होली मुबारक

नैनीताल: मौसम के आगमन के साथ ही देवताओं की भूमि उत्तराखंड पर होली का रंग चढ़ने लगा है। ख़ासकर कुमाऊं में तो होली का रंग अभी से हवा में नज़र आने लगा है। बरसाने की लाठी मार होली की तरह कोमाओं की होली की भी अपनी विशेष महत्व है। कुमाऊं में होली की शुरूआत दो महीने पहले हो जाती है।

अबीर, गुलाल के साथ ही होली के गानों का ख़ास रिवाज है। यहां की होली पूरी तरह से हिंदुस्तानी शास्त्रीय अंदाज़ में गाई जाती है। होली के नग़मे गणेश पूजन से शुरू हो कर पशोपती नाथ शिव जी की पूजा के साथ ब्रिज की राधा की हंसी ठटोले से शराबोर होती है।

कुमाऊं में होली दो तरह की होती है। बैठकी होली के गीतों से होली की शुरूआत होती है। बैठकी होली मकान और मंदिर में गाई जाती है। कहा जाता है कि बसंत पनछमी से होली शुरू होजाती है लेकिन कोमाओं के कुछ हिस्सों में पोशप मास के पहले रविवार से होली की शुरूआत होजाती है। इस वक़्त ठंड का मौसम अपने उरूज पर होता है। ठंड रातों को काटने के लिए सुरीली महफ़िलों का आयोजन किया जाता है। हारमोनियम-तबले की थाप पर राग रागनियों का दौर शुरू होजाता है।

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