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विवादित जमीन का मस्जिद निर्माण के लिए बंटवारा कबूल नहीं- सुब्रमण्यम स्वामी

नई दिल्ली। बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए कानून और संविधान के दायरे में हरेक विकल्प पर विचार किया जाएगा।

बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में स्वामी ने कहा कि मस्जिद बनाने के लिए विवादित भूमि के विभाजन का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है और यह प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है।

स्वामी ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से 95 फीसदी हम जीत गए थे। लेकिन वे लोग इसे मानने के लिए तैयार नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट में अपील हमने नहीं की।

वही लोग सुप्रीम कोर्ट गए। सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि विवादित भूमि का बंटवारा मस्जिद निर्माण के लिए नहीं किया जाना स्वीकार्य नहीं है।

स्वामी ने कहा, ‘सुन्नी वक्फ बोर्ड कहती है कि बाबर ने कब्जा की 500 साल से हमारे पास है। यह सबसे कमजोर ऑर्ग्यूमेंट है।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टाइटल सूट को रिजेक्ट कर दिया था। सुन्नी वक्फ बोर्ड कहता है कि बाबर की प्रॉपर्टी है इसलिए हमारी है। यह ऑर्ग्यूमेंट कोर्ट में कहीं नहीं ठहरेगा।’

इस पूरे मामले में बीजेपी के जुड़े होने के सवाल पर स्वामी ने कहा, ‘इस पूरे विषय में बीजेपी कहीं नहीं है। मैं बीजेपी के प्रतिनिधि के रूप में नहीं कर रहा हूं।

अशोक सिंघल जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जब कहा कि मैं दुखी हूं और मेरे ऊपर सभी चीजें उन्होंने छोड़ दी तब मैं इस केस में शामिल हुआ। आरएसएस ने भी इस मामले में पूरी तरह साथ नहीं दिया। बीजेपी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई।’

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, ‘मुझे मुसलमान नेताओं ने कहा कि हम अगर समझौता करेंगे तो कट्टरवादी लोग आरोप लगाएंगे कि हम हिंदुओं से पैसे लेकर बिक गए। देश का मुसलमान चाहता है कि अयोध्या में राम मंदिर बने। मस्जिद तो कहीं भी बनाई जा सकती है।’

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