वेब साईट्स को सेंसर करने का कोई मंसूबा नहीं : हुकूमत

वेब साईट्स को सेंसर करने का कोई मंसूबा नहीं : हुकूमत
नई दिल्ली, ०७ फ़रवरी (पी टी आई) हुकूमत ने आज कहा कि सोश्यल नेटवर्किंग और दीगर वेब साईट्स पर रोक लगाने या संसर का सवाल ही पैदा नहीं होता, लेकिन इन वेब साईट्स को हिंदूस्तानी क़वानीन के दाइरा-ए-कार में अपना काम अंजाम देना चाहीए साथ ही साथ व

नई दिल्ली, ०७ फ़रवरी (पी टी आई) हुकूमत ने आज कहा कि सोश्यल नेटवर्किंग और दीगर वेब साईट्स पर रोक लगाने या संसर का सवाल ही पैदा नहीं होता, लेकिन इन वेब साईट्स को हिंदूस्तानी क़वानीन के दाइरा-ए-कार में अपना काम अंजाम देना चाहीए साथ ही साथ वो जवाबदेह भी हो।

मिनिस्टर आफ़ स्टेट कम्यूनीकेशन-ओ-इन्फ़ार्मेशन टैक्नोलोजी सचिन पायलट ने अख़बारी नुमाइंदों से बातचीत करते हुए कहा कि कोई सोश्यल मीडीया वेब साईट कंपनी हो या कोई और कंपनी इन सब को मुल्की क़वानीन के दाइरा-ए-कार में रह कर अपना काम करना चाहीए। हुकूमत ने इन कंपनीयों पर ये भी वाज़िह किया है कि अपने तर्ज़ अमल के लिए जवाबदेह रहेंगी।

उन्होंने कहा कि सेंसरशिप का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। इस मुआमले पर दिल्ली हाइकोर्ट पर जारी मुक़द्दमा के बारे में पूछे जाने पर उन्हों ने कहा कि हुकूमत किसी सूरत सेंसरशिप की तजवीज़ नहीं रखती। जब उन से पूछा गया कि दिल्ली हाइकोर्ट ने हुकूमत के मौक़िफ़ की नफ़ी की है, उन्हों ने कहा कि हुकूमत का मौक़िफ़ अलैहदा नौईयत का नहीं है।

हम सिर्फ यही चाहते हैं कि क़ानून पर अमल आवरी की जाए। सचिन पायलट ने कहा कि इन वेब साईट्स के लिए जो रहनुमा या ना क़वानीन तैयार किए गए हैं, उन पर पहले ही मुताल्लिक़ा कंपनीयों से तबादला-ए-ख़्याल किया गया था। जब कभी कोई क़ाबिल एतराज़ मवाद पेश किया गया तो उसे दूर करने का भी कोई सिस्टम होना चाहीए।

उन्होंने वाज़िह किया कि किसी इन्फ़िरादी शख़्स की जानिब से हो या कंपनी की जानिब से जब एतराज़ किया जाय तो उसे जवाब देना ज़रूरी होगा। उन्हों ने कहा कि हम ने इन कंपनीयों से कोई मुतालिबा नहीं किया है बल्कि सिर्फ ये तक़ाज़ा कर रहे हैं कि हमारे क़वानीन के दाइरा-ए-कार से तजावुज़ ना करें। इस दौरान फेसबुक इंडिया ने दिल्ली हाइकोर्ट में तामील रिपोर्ट पेश कर दी।

अदालत ने फेसबुक और 21 दीगर वेब साईट्स को काबुल एतराज़ मवाद अपनी वैब साईट्स से निकाल देने का हुक्म दिया था। गूगल इंडिया ने भी अदालत को बताया कि इस ने इंटरनेट से बाअज़ ऐसे वेब पोज्स हज़फ़ कर दिए हैं जिन पर दरख़ास्त गुज़ार ने एतराज़ किया था। इस दौरान फेसबुक, याहू, माईक्रो साफ़्ट ने अदालत को बताया कि इस मुक़द्दमा में इन का कोई रोल नहीं है और उन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की कोई वजह भी नज़र नहीं आती।

एडीशनल सियोल जज प्रवीण सिंह ने दरख़ास्त गुज़ार मुफ़्ती एजाज़ अरशद क़ासिमी की जानिब से पेश होने वाले वकील से सवाल किया कि क्या ब्लॉग सरविस फ़राहम करने वाली कंपनीयों को इस मुक़द्दमा मैं फ़रीक़ बनाया जा सकता है? एक मरहले पर जज ने गूगल के नुमाइंदा से भी कहा कि आप सही जवाब नहीं दे रहे हैं और ये इस्तेदलाल मुस्तर्द करदिया कि अदालत के हुक्मनामा की नक़ल और दीगर दस्तावेज़ात कंपनीयों को गुज़श्ता जुमा मौसूल हुई थी।

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