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वो तमाम मंदिरो को बंद कर दो जहां औरत की पूजा का ढोंग होता है

मुंबई, 30 दिसंबर: दिल्ली में इजतिमाई इस्मत रेज़ि की शिकार 23 साला लड़की की सिंगापुर में कल मौत पर जहां सारे मुल्क की फ़िज़ा-ए-मग़्मूम हो गई है, अहम सयासी क़ाइदीन और दीगर तमाम शोबा हयात से ताल्लुक़ रखने वाले मुमताज़ शख़्सियात इस वाक़िया पर अपने

मुंबई, 30 दिसंबर: दिल्ली में इजतिमाई इस्मत रेज़ि की शिकार 23 साला लड़की की सिंगापुर में कल मौत पर जहां सारे मुल्क की फ़िज़ा-ए-मग़्मूम हो गई है, अहम सयासी क़ाइदीन और दीगर तमाम शोबा हयात से ताल्लुक़ रखने वाले मुमताज़ शख़्सियात इस वाक़िया पर अपने रद्द-ए-अमल का इज़हार कर रहे हैं।

इनमें बाली वुड के सितारे भी किसी से पीछे नहीं हैं। अमिताभ बच्चन, शबाना आज़मी, महेश भट्ट, लता मंगेशकर, अनुपम खेर, शेखर कपूर और दूसरों ने सख़्त अल्फ़ाज़ में अपने रद्द-ए-अमल का इज़हार किया है। अमिताभ बच्चन ने ट्वीटर पर लिखा कि अमानत! दामिनी अब सिर्फ़ नाम रह गया है, इसका जिस्म चला गया लेकिन उसकी रूह हमेशा हमारे दिलों को झिंझोड़ती रहेगी।

लता मंगेशकर ने लिखा कि अब बहुत हो चुका है, ये किसी बेलाग, निडर-ओ-बेखौफ दामिनी की मौत नहीं है बल्कि हमारे मुल्क में सारी इंसानियत की मौत है। अब वक़्त आ गया है कि वो गहरी नींद से जागे और इस वहशयाना जुर्म के ख़ातियों को इबरतनाक सज़ाएं दी जाएं।

समाजी मसाइल पर मुनफ़रद बाग़ियाना तेवर के लिए मशहूर शबाना आज़मी ने जो इस वाक़िया के ख़िलाफ़ सरगर्म मुहिम चला चुकी हैं, लिखा है कि अब वो गुज़र चुकी है, हमारी बुज़दिली और कमज़ोरी ने हमारे ही चेहरों को दागदार बना दिया है। अब हमें अपने मुहज़्ज़ब समाज के लिए शिद्दत से मतलूब तहफ़्फ़ुज़ निसवां को यक़ीनी बनाना होगा।

शबाना आज़मी ने मज़ीद लिखा कि हम ये नहीं चाहते कि हमें देवी का दर्जा दिया जाये बल्कि हम एहतिराम और मुसावात का मुतालिबा करते हैं। अब वक़्त आ गया है कि रूह को झझोड़ा जाये और तजज़िया किया जाये कि किस तरह हर शोबा इस किस्म के भयानक जराइम की ज़द में आया है और क्या वजह है कि एक ऐसा ज़हन बन गया है जिसके ज़रीया मर्द अब औरत से इमलाक-ओ-अशीया जैसा सुलूक करने लगा है।

बेबाक रद्द-ए-अमल के लिए मशहूर फ़िल्म डायरेक्टर महेश भट्ट ने इंतिहाई सख़्त अल्फ़ाज़ में अपनी ब्रहमी का इज़हार करते हुए लिखा है कि उन तमाम मंदिरों को बंद कर दें जहां हम देवी के रूप में औरत की पूजा का ढोंग करते हैं।

उन्होंने मज़ीद लिखा कि हिंदुस्तान को आह-ओ-ज़ारी करना चाहीए कि अब हमारे हाथ ख़ुद अपनी ही बेटीयों के ख़ून से आलूदा हो गए हैं। महेश भट्ट ने ख़वातीन से मुख़ातिब होते हुए लिखा कि अविर तो! आपकी ख़ामोशी आपकी हिफ़ाज़त नहीं कर सकती, आप बोल उठें या हमेशा के लिए ख़ामोश हो जाएं।

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