वज़ीरे आज़म नरेंद्र मोदी के ब्यान का ख़ैर मक़दम

वज़ीरे आज़म नरेंद्र मोदी के ब्यान का ख़ैर मक़दम

जनाब मुहम्मद उसमान शहीद ऐडवोकेट सदर ऑल इंडिया मुस्लिम फ्रंट ने अपने सहाफ़ती ब्यान में वज़ीरे आज़म हिंदुस्तान श्री नरेंद्र मोदी के ब्यान का इस्तिक़बाल किया कि अब हुकूमत किसी भी मज़हब में मुदाख़िलत नहीं करेगी और हर फ़र्द को अपने मज़हब के उसूलों पर चलने उस पर अमल करने की मुकम्मल आज़ादी रहेगी। इस तरह वज़ीरे आज़म ने दस्तूर की दफ़ा 25 का एहतिराम किया है जो ख़ुश आइंद बात है।

शायद मोदी जी को इस हक़ीक़त को क़ुबूल करना पड़ा कि हिंदुस्तान किसी एक मज़हब पर अमल पैरा नहीं हो सकता। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हैरत अंगेज़ कामयाबी ने भी शायद बी जे पी के ज़हन की तबदीली में अहम रोल अदा किया है।

बी जे पी अब ये सोंचने पर मजबूर हो गई है कि हिंदुत्वा का हथियार कुंद हो गया है और घर वापसी का नारा ख़ुद उन के गले की हड्डी बन गया है। श्री नरेंद्र मोदी को भी चाहीए कि वो कभी मुसलमानों के किसी जल्से में मदऊ हों तो इसी तरह का वाज़ेह त्यक्क़ुन दें। सदर अमरीका मिस्टर ओबामा की तक़रीर ने भी अपना रंग दिखाया है जब ही तो मोदी जी को इस तरह का त्यक्क़ुन अक़लीयतों को देना पड़ा।

उन्हों ने कहा कि मुसलमानों को चाहीए कि वो अपना सियासी वज़न महसूस करें वो बादशाहगर हैं किसी भी बादशाह के ग़ुलाम नहीं। उन्हें चाहीए कि वो किसी सेक्यूलर तंज़ीम का खुल कर साथ दें ताकि उन की शनाख़्त उन के मज़हब उन की तहज़ीब उन की ज़बान का तहफ़्फ़ुज़ हो सके।

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