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वज़ीर-ए-आज़म और सोनीया गांधी के हाथों बनीहाल । क़ाज़ी गुंड ट्रेन का इफ़्तेताह

बनीहाल (जम्मू-कश्मीर) 27 जून (पी टी आई) वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह और सदर नशीन यू पी ए सोनीया गांधी ने आज जम्मू इलाक़े के बनीहाल को वादी कश्मीर के क़ाज़ी गुंड से मरबूत करनेवाली पहली ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना किया। नौ तामीर शूदा रेलवे स्टेशन ज

बनीहाल (जम्मू-कश्मीर) 27 जून (पी टी आई) वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह और सदर नशीन यू पी ए सोनीया गांधी ने आज जम्मू इलाक़े के बनीहाल को वादी कश्मीर के क़ाज़ी गुंड से मरबूत करनेवाली पहली ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना किया। नौ तामीर शूदा रेलवे स्टेशन जो श्रीनगर से 125 किलो मीटर के फ़ासिले पर है, इंतिहाई अहम शख़्सियात के खैरमक़दम के लिए फूलों और हारूँ से सजाया गया था।

जम्मू को वादी कश्मीर से मरबूत करनेवाली पहली ट्रेन पैर पंचाल इलाक़े में 11 किलोमीटर तवील सुरंग से गुज़रेगी। इस के 8 डिब्बे स्कूली बच्चों और अरकान और रेलवे के अरकान अमले के स्कूली बच्चों के लिए मुख़तस की गई हैं। ये ट्रेन 25 मिनट में बनीहाल से क़ाज़ी गुंड पहूंच जाएगी और मुल्क की तवील तरीन सुरंग से गुज़रेगी।

इस राबिता के ज़रीये 35 किलोमीटर का फ़ासिला कम होकर 18 किलोमीटर होगया है। ट्रेन की पटरियां 1691 करोड़ रुपय की लागत से तामीर की गई हैं। वज़ीर-ए-आज़म और सोनीया गांधी ट्रेन की रवानगी से क़बल इस में सवार होगए थे और उन्होंने स्कूली बच्चों के साथ तबादला-ए-ख़्याल किया।

वो बनीहाल से नई सुरंग के ज़रीये वापिस पहूंचे। ऊधम पुर । बनीहाल सैक्शन तवक़्क़ो है कि 2017 तक मुकम्मल होजाएगा और वादी कश्मीर को साल भर किसी रुकावट के बगै़र बाक़ी मुल्क से मरबूत करेगा। ट्रेन की बाक़ायदा ख़िदमात का बनीहाल से शुमाली कश्मीर के इलाक़े बारहमुल्ला तक 27 जून से आग़ाज़ होजाएगा। बनीहाल । बारहमुल्ला । बनीहाल ट्रेन रोज़ाना 5 चक्कर करेगी जिन का आग़ाज़ बनीहाल से 7.10 बजे सुबह और बारहमुल्ला से 7.35 बजे सुबह रवानगी के ज़रीये होगा।

तक़रीब इफ़्तेताह में वज़ीर-ए-आज़म और सोनीया गांधी के अलावा गवर्नर जम्मू-ओ-कश्मीर एन एन वोहरा, चीफ़ मिनिस्टर उमर अबदुल्लाह, वज़ीर रेलवे मल्लिकार्जुन खरगे और वज़ीर-ए-सेहत ग़ुलाम नबी आज़ाद मौजूद थे। ट्रेन ख़िदमात वादी कश्मीर में 118 किलो मीटर तवील रास्ता से गुज़रती हुई शुमाली कश्मीर के इलाक़ा बारहमुल्ला को पहले ही क़ाज़ी गुंड से मरबूत कररही है। जिसका इफ़्तेताह 11 अक्टूबर 2008 को वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने किया था।

नए ऑस्ट्रियाई सुरंग की तामीर के तरीक़े का इस्तेमाल करते हुए नई सुरंग तामीर की गई है और हिन्दुस्तान में इतने बड़े पैमाने पर इस का पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है। ये तरीक़ा सुरंग की साख्त को आज़म तरीन हद तक बेहतर बनाता है और ज़मीन की क़ुदरती मज़बूती इस पेचीदा सैक्शन में सुरंग खोदने में मददगार साबित हुई।

बुनियादी सहारा देने वाला निज़ाम खुदाई के फ़ौरी बाद फ़राहम किया गया और निगरानी के ज़रीये उसकी क़ुदरती मज़बूती को मज़ीद तरक़्क़ी दी गई। तीन मीटर चौड़ी सड़क सुरंग से गुज़रती है, जिसका मक़सद ट्रेन के रास्ते की देख भाल और हंगामी हालात में बचाओ और राहत कार्यवाहीयां होंगी। सुरंग को मुसलसल पी वी सी परत, बुनियादी और ज़िमनी परत के दरमियान फ़राहम करते हुए पानी से बिलकुल महफ़ूज़ बनाया गया है।

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