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वज़ीर-ए-आज़म की जनरल असैंबली इजलास में शिरकत केलिए आज रवानगी

नई दिल्ली। 20 सितंबर (पी टी आई) वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की जनरल असैंबली के इजलास में हफ़्ता के दिन शिरकत केलिए कल न्यूयार्क रवाना होजाएंगे, जहां हिंदूस्तान सलामती कौंसल में इस्लाहात केलिए ज़ोर देगा ताकि उसे मौजूदा

नई दिल्ली। 20 सितंबर (पी टी आई) वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की जनरल असैंबली के इजलास में हफ़्ता के दिन शिरकत केलिए कल न्यूयार्क रवाना होजाएंगे, जहां हिंदूस्तान सलामती कौंसल में इस्लाहात केलिए ज़ोर देगा ताकि उसे मौजूदा हक़ायक़ की अक्कास बनाया जा सके। इलावा अज़ीं हिंदूस्तान दहश्तगर्दी पर एक कनवेनशन की आजिलाना मंज़ूरी का भी मुतालिबा करेगा, जिस के ज़रीया इस लानत से जंग करने का एक आलमी चौखटा फ़राहम किया जा सके। वज़ीर-ए-ख़ारजा ऐस ऐम कृष्णा, मुशीर क़ौमी सलामती शिव शंकर मेनन , मोतमिद ख़ारिजा रंजन मथाई भी वज़ीर-ए-आज़म के हमराह होंगे और जनरल असैंबली में हफ़्ता के दिन हिंदूस्तान की आला सतही हलक़ा में नुमाइंदगी करेंगे, जबकि वज़ीर-ए-आज़म जनरल असैंबली से ख़िताब करेंगी। इजलास के दौरान हिंदूस्तान G-4 के दीगर अरकान (ब्राज़ील, जापान और जर्मनी) के साथ अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की सलामती कौंसल में जल्द अज़ जल्द इस्लाहात केलिए मुशतर्का जद्द-ओ-जहद करेगा ताकि ताक़तवर बैन-उल-अक़वामी सयान्ती और बहाली अमन कार्यवाहीयां की जा सकें। G-4 के अरकान, अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की सलामती कौंसल में मुस्तक़िल रुकनीयत हासिल करने में गहिरी दिलचस्पी रखते हैं। फ़िलहाल हिंदूस्तान और जर्मनी सलामती कौंसल के ग़ैर मुस्तक़िल रुकन हैं। इजलास का आग़ाज़ एक ऐसे वक़्त होरहा है, जबकि आलमी मआशी-ओ-मालीयाती सूरत-ए-हाल ग़ैर यक़ीनी है। हिंदूस्तान उभरती हुई मईशत की हैसियत से अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के साथ इश्तिराक-ओ-तआवुन का दुबारा तीक़न देगा ताकि आलमी मईशत और मालीयाती इस्तिहकाम-ओ-मुतवाज़िन तरक़्क़ी को फ़रोग़ दिया जा सके। मनमोहन सिंह और सदर अमरीका बारक ओबामा के दरमयान कोई मुलाक़ात मुक़र्रर नहीं है जो वज़ीर-ए-आज़म की आमद से पहले न्यूयार्क के लिए रवाना होंगी, ताहम मनमोहन सिंह दो साल के वक़फ़ा से अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की जनरल असैंबली के इजलास में शिरकत कररहे हैं, चुनांचे दीगर हुकूमतों और मुमलकतों के सरबराहों से मुलाक़ातें मुतवक़्क़े हैं। एक सरकारी ओहदेदार ने कहा कि हिंदूस्तान की तर्जीहात में आलमी इदारा में इस्लाहात और एक मुसावात की बुनियाद पर निज़ाम की तैय्यारी जो असरी हक़ायक़ का अक्कास हो, शामिल हैं। इजलास में हिंदूस्तान जामि कनवेनशन बराए बैन-उल-अक़वामी दहश्तगर्दी की मंज़ूरी केलिए ज़ोर देगा, जो एक आलमी रस्मी चौखटा, दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ फ़राहम करसकी। हिंदूस्तान ताक़तवर बैन-उल-अक़वामी तआवुन और दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ इजतिमाई कार्रवाई के मुतालिबा करेगा और वसाइल को ज़्यादा मुतहर्रिक करने पर ज़ोर देगा। हिंदूस्तान अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के रुकन ममालिक के साथ इंसानी हुक़ूक़ के मसाइल पर सरगर्म तआवुन करेगा ।न्यूक्लियर तहफ़्फ़ुज़-ओ-सयानत के इक़दामात में भी सरगर्म हिस्सा लेगा।

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