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वज़ीर-ए-आज़म को राज धरम का सबक़ याद करने की ज़रूरत

नई दिल्ली: बिहार की इंतेख़ाबी रैली में ख़िताब के दौरान वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी की जानिब से 1984 के मुख़ालिफ़ सिख फ़सादात‌ का तनाज़े करदेने पर कांग्रेस ने भी जैसा को तैसा जवाब दिया और दरयाफ़त किया कि 2015 में क्या वो राज धरम भूल गए हैं क्योंकि उन्होंने नफ़रत और तशद्दुद की कार्यवाईयों पर अमलन ख़ामोशी इख़तियार करते हुए अदम तहम्मुल की तौसीक़ कर दी है।

कांग्रेस ने वज़ीर-ए-आज़म पर ये भी इल्ज़ाम आइद किया कि अक़िलेती तलबा को निशाना बनाकर समाजी ताने-बाने को ज़बरदस्त नुक़्सान पहुंचा रहे हैं । पार्टी तर्जुमान मिस्टर आनंद शर्मा ने कहा कि वज़ीर-ए-आज़म का बयान सियासी मुहर्रिकात और शरपसंदी पर मबनी है जिसका मक़सद 31 साल बाद ज़ख़मों को कुरेदना है।

उन्होंने कहा कि वज़ीर-ए-आज़म 1984 के मुख़ालिफ़ सिख फ़सादात‌ का मसला छेड़ते हुए अवाम की इस तशवीश से तवज्जे हटाना चाहते हैं जो कि नफ़रत अंगेज़ मुहिम की वजह से अवाम में ख़ौफ़ और हिरासानी पैदा हो गई है। कांग्रेस लीडर ने याद दहानी की कि साबिक़ वज़ीर-ए-आज़म अटल बिहारी वाजपाई ने 2002 में नरेंद्र मोदी को बहैसियत चीफ मिनिस्टर राज धरम निभाने का मश्वरा दिया था जब गुजरात में ख़ौफ़नाक फ़िर्कावाराना फ़सादाद फूट पड़े थे और साल 2002 की तरह नरेंद्र मोदी 2015 में भी राज धरम को भुला दिया है और ये इल्ज़ाम आइद किया कि अपनी मानी ख़ेज़ ख़ामोशी के ज़रिये अदम तहम्मुल की तौसीक़ कर दी है।

मिस्टर आनंद शर्मा ने कहा कि उन्हें बी जे पी लीडर यह आर एस एस प्रचारक की बजाय वज़ीर-ए-आज़म हिंद की तरह काम करना चाहिए

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