Wednesday , August 22 2018

वज़ीर-ए-आज़म मोदी का नवंबर में दौरा-ए-तुर्की मुतवक़्क़े

कोलकाता : हिन्दुस्तान के साथ आला सतह पर रवाबित को वुसअत देने के लिए कोशां तुर्की वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी के नवंबर में तय‌ शूदा G20 चोटी कान्फ़्रेस के लिए दौरा-ए-तुर्की का मुंतज़िर है। बजा तौर पर हम सीनियर सतह पर मज़ीद गुफ़्त-ओ-शनीद के लिए

कोलकाता : हिन्दुस्तान के साथ आला सतह पर रवाबित को वुसअत देने के लिए कोशां तुर्की वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी के नवंबर में तय‌ शूदा G20 चोटी कान्फ़्रेस के लिए दौरा-ए-तुर्की का मुंतज़िर है। बजा तौर पर हम सीनियर सतह पर मज़ीद गुफ़्त-ओ-शनीद के लिए ज़्यादा से ज़्यादा मवाक़े के मुंतज़िर हैं और तुर्की (इस ज़िमन में) G20 सिमट के लिए वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी के दौरा-ए-तुर्की का इंतेज़ार कररहा है, सफ़ीर तुर्की बराए हिंद बुराक़ इक्का पर ने गुज़श्ता शाम देर गए यहां अपनी किताब बउनवान अवाम का मिशन बराए सलतनत उस्मानिया: एम ए अंसारी और इंडियन मेडीकल मिशन, 1912-1913 की रस्म इजराई के मौक़े पर मीडियावालों से बातचीत के दौरान कही।

इन शोबों के बारे में जिन में तुर्की, हिन्दुस्तान में सरमायाकारी करना चाहेगा, तर्क सफ़ीर ने कहा, हम शहरी हवाबाज़ी शोबा, मआशी शोबा, सयाहती शोबा में सरमाये मशग़ूल करना चाह रहे हैं। उन्होंने मज़ीद ज़ोर दिया कि तुर्की मर्कज़ी हुकूमत के प्रोग्राम मेक इन इंडिया के तनाज़ुर में मुम्किना मौक़े का भी जायज़ा ले रहा है।

तवक़्क़ो है दोनों मुल्कों के वुज़रा एक दस्तावेज़ पर दस्तख़त करते हुए ये दोनों दोस्त ममालिक के सदीयों क़दीम रिश्ते को आगे बढ़ाईंगे। ये पूछने पर आया दोनों मुल्कों को अभी तक काफ़ी मज़बूत रिश्ता क़ायम कर लेना चाहिए था, सफ़ीर मौसूफ़ ने कहा, हाँ, मेरे ख़्याल में हम ने सर्द जंग के दौरान कई दहिय खो दिए।

लेकिन अब सर्द जंग नहीं रही और दोनों तरफ़ की क़ियादत ने दोनों मुल्कों के दरमियान ताक़तवर रिश्ता उस्तिवार करने के मुहासिन का जायज़ा ले लिया है और में समझता हूँ इक़दामात किए जा रहे हैं। इस साल के पहले चौथाई में क्या हुआ। मैडम ( सुषमा) स्वराज तुर्की गईं, तुर्क नायब वज़ीर-ए-आज़म (अली बबाक़न) यहां आए, हमारे वज़ीरे फाइनेंस‌ (भी) यहां आए, जनरल वी के सिंह वहां गए, वज़ीर रेलवे (सुरेश प्रभु) तुर्की को गए इस तरह महेज़ तीन ता चाह माह में काफ़ी ताल मेल हुआ है जिस से पता चलता है कि दोनों ममालिक कोई रिश्ता उस्तिवार करने के तईं संजीदा हैं।

उन्होंने कहा कि आख़िरी हिन्दुस्तानी वज़ीर-ए-आज़म जो तुर्की का दौरा किए, 13 साल क़बल अटल बिहारी वाजपाई थे। तुर्क सफ़ीर ने कहा कि हम मेक इन इंडिया के तनाज़ुर में मुम्किना मौक़े में सरमाया मशग़ूल करने के मुंतज़िर हैं, लेकिन अभी कोई ठोस इक़दामात नहीं हुए हैं।

TOPPOPULARRECENT