Wednesday , December 13 2017

वज़ीर क्या, सीएम भी कवानीन नहीं बदल सकते : रघुवर दास

रियासत की वज़ीर क्या, वज़ीरे आला भी किसी कवानीन में तबदीली नहीं कर सकते और लोगों की बहाली मंसूख नहीं कर सकते। यह बात जमशेदपुर के एसेम्बली रुक्न रघुवर दास ने बुध को सिदगोड़ा मंदिर में एक प्रेस कांफ्रेंस में कही। मिस्टर दास ने कहा कि भ

रियासत की वज़ीर क्या, वज़ीरे आला भी किसी कवानीन में तबदीली नहीं कर सकते और लोगों की बहाली मंसूख नहीं कर सकते। यह बात जमशेदपुर के एसेम्बली रुक्न रघुवर दास ने बुध को सिदगोड़ा मंदिर में एक प्रेस कांफ्रेंस में कही। मिस्टर दास ने कहा कि भोजपुरी या मगही ज़ुबान के खिलाफ दिया गया तालीम वज़ीर गीताश्री उरांव का बयान, फूट डालो राज करो वाली अंगरेजी हुकूमत की पॉलिसी की याद दिलाता है।

कांग्रेस आदिवासी और गैर आदिवासियों के दरमियान खाई पैदा कर और जहर फैला कर सियासत का फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रही है। मिस्टर दास ने कहा कि मौजूदा हुकूमत का पहला एजेंडा मुक़ामी की पॉलिसी तय करना था, जो वह तय नहीं कर पायी। झारखंड में हमेशा आदिवासी वज़ीरे आला और बहबूद वज़ीर रहे, लेकिन हालात बदतर ही है।

कांग्रेस में शामिल लोग ज़बान और मजहब की बुनियाद पर तफ़रीक़ पैदा करेंगे तो लोगों का इत्तेमाद पार्टी से उठेगा। इसलिए कोई भी बयान या फैसला लेने से पहले वज़ीरे तालीम को इस मौजू में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि भोजपुरी और मगही पलामू डिवीजन के इलावा हजारीबाग,चतरा,धनबाद इलाकों में इस ज़ुबान का इस्तेमाल होता है।

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