Thursday , December 14 2017

शत्रुघ्न सिन्हा ने मोदी-अमित शाह को बताया टू मेन आर्मी, कहा बीजेपी में 80% लोग आडवाणी को चाहते थे राष्ट्रपति बनाना

नई दिल्ली :  शॉटगन कहे जाने वाले शत्रुघ्न सिन्हा ने उनके निर्वाचन क्षेत्र में होने वाले एक बड़े कार्यक्रम से उन्हें बाहर रखे जाने के मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में शिरकत करेंगे लेकिन चार बार पटना से बीजेपी के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा को इस कार्यक्रम से बाहर रखा गया है.
उन्होंने उन्हें अनदेखा किए जाने पर प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को परोक्ष रूप से निशाना बनाते हुए उन्हें  “टू मेन आर्मी.” कहा है।
बीजेपी नेता शत्रुघ्न सिन्हा  ने कहा कि 80 फीसदी बीजेपी नेता और लोग लालकृष्ण आडवाणी को राष्ट्रपति के तौर पर चाहती थी, लेकिन उन्हें साइड लाइन में रखा गया.   बीजेपी द्वारा रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए नामित किए जाने से कुछ हफ्तों पहले इस अभिनेता व राजनेता ने ट्विटर पर 89 वर्षीय पूर्व उप प्रधानमंत्री आडवाणी के समर्थन में एक अभियान चलाया था. जब पूछा गया कि क्या आडवाणी ने अपनी पिच के बारे में सोचा, तो सिन्हा ने कहा “इस तरह नहीं, जिस तरह हमने योजना बनाई थी.”

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि “मैंने कुछ हफ्ते पहले प्रधानमंत्री से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मुझे समय नहीं दिया.  शत्रुघ्न सिन्हा 2013 में आडवाणी के नेतृत्व में बने बीजेपी के उस समूह का हिस्सा थे जिसने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में न चुनने का पार्टी से आग्रह किया था. इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था और मोदी के नेतृत्व में 2014 के राष्ट्रीय चुनावों में बीजेपी को बड़ी जीत मिली. इसके कुछ समय बाद ही आडवाणी की पार्टी में सलाहकार की भूमिका समाप्त कर दी गई और वे औपचारिक मौजूदगी तक ही सीमित हो गए.

इन हालात में पूर्व केंद्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा भी बीजेपी के अभियानों और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से बाहर रखे जाने लगे. सिन्हा पार्टी में अपनी नीतियों के आलोचकों के साथ अक्सर जोरदार संघर्ष करते हैं और कहते हैं कि वे कभी भी बीजेपी नहीं छोड़ेंगे.

उन्होंने यह भी याद किया कि दो साल पहले बिहार के चुनावों से पहले उन्होंने अमित शाह के साथ बैठक करने की कोशिश की थी क्योंकि उन्हें चुनाव अभियान के लिए नहीं कहा गया था. उन्होंने कहा “मैं केवल एक था जिससे प्रधानमंत्री या किसी ने नहीं पूछा. मेरे लिए प्रचार सिर्फ  सोनाक्षी सिन्हा (उनकी बेटी और अभिनेत्री) ने किया और फिर भी मैं सबसे बड़े वोट शेयर के साथ जीता.”

गौरतलब है कि आडवाणी एक बड़े कद के नेता हैं, अपनी पूरी जिंदगी पार्टी को खड़ा करने में लगा दी, 2009 के चुनाव में बतौर प्रधानमंत्री उम्मीदवार उन्हें चुना गया था, और उनकी दावेदारी सबसे प्रबल लगती होगी.  यह किसी से छुपा नहीं है कि मोदी और आडवाणी के बीच संबंध सहज नहीं हैं. 2014 के चुनाव के बाद आडवाणी को राजनीतिक सन्यास लेना पड़ा. उस अवस्था में कोई बदलाव नहीं आया है. और मोदी उसे बदलना भी नहीं चाहेंगे, ऐसे में अडवाणी गुट के बड़े नेता अपना दर्द बाहर निकालेंगे ही।

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