शब्बे बरात में ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू के साथ इबादात

शब्बे बरात में ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू के साथ इबादात
दोनों शहरों में शब्बे बरात का इंतेहाई ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू और अक़ीदत के साथ एहतेमाम किया गया। शब्बे बरात के मौके पर मुख़्तलिफ़ मसाजिद-ओ-ख़ानक़ाहों में इजतिमाई दाये निस्फ़ शाबान का एहतेमाम किया गया था।

दोनों शहरों में शब्बे बरात का इंतेहाई ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू और अक़ीदत के साथ एहतेमाम किया गया। शब्बे बरात के मौके पर मुख़्तलिफ़ मसाजिद-ओ-ख़ानक़ाहों में इजतिमाई दाये निस्फ़ शाबान का एहतेमाम किया गया था।

दोनों शहरों के मुख़्तलिफ़ मुक़ामात पर जलसा हाय शब्बे बरात मुनाक़िद किए गए जिन से मुक़ामी-ओ-बेरूनी उल्मा ने ख़िताब किया। जलसा शब्बे बरात से मुख़ातिब करने वाले उल्मा-ओ-मशाइख़ीन ने उम्मते मुस्लिमा को तलक़ीन की के वो अपने दीन-ओ-अक़ीदे की हिफ़ाज़त पर तवज्जा दें।

उल्मा ने मुसलमानों को मश्वरह दिया कि माह शाबान के बाद आने वाले रहमतों-ओ-बरकतों वाले महीने रमज़ान उल-मुबारक के इस्तिक़बाल की तैयारीयों का आग़ाज़ करदें।

मुसलमानों को चाहीए कि वो आइन्दा माह की इबादतों में लज़्ज़त को महसूस करने के लिए अभी से इबादतों की कसरत शुरू करदें ताके माह रमज़ान उल-मुबारक के दौरान की जाने वाली इबादतों में उन्हें ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू मयस्सर आए।

उल्मा-ओ-मशाइख़ीन ने इन जलसा हाय शब्बे बरात से ख़िताब के दौरान कहा कि अल्लाह ताआला इस शब में बंदों के आमाल का जायज़ा लेते हुए उन के अगले साल के लिए मुक़द्दरात के फ़ैसले फ़रमाता है।

उल्मा ने ये भी कहा कि शाबान की 15 वीं शब से जो इबादतों का सिलसिला अल्लाह वाले शुरू किया करते थे ये सिलसिले ख़त्म रमज़ान उल-मुबारक तक जारी रहते थे।

जामि मस्जिद दारुलशफ़ा के अलावा जामि मस्जिद चौक में मौलाना हुसाम उद्दीन सानी जाफ़र पाशाह का ख़ुसूसी ख़िताब हुआ जबकि कुल हिंद बज़म रहमते आलम की तरफ से क़ुली क़ुतुब शाह स्टेडीयम में जलसा शब्बे बरात मुनाक़िद किया गया।

इस जलसे में अल्हाज सूफ़ी अबदुलक़ादिर बादशाह कादरी चिशती शाज़ली ने बहैसीयत मेहमान ख़ुसूसी शिरकत की। मर्कज़ मीलाद कमेटी के ज़ेरे एहतेमाम खिलवत ग्राउंड पर जलसा शब्बे बरात मुनाक़िद हुआ जिस से बिहार के मौलाना मुहम्मद उम्र नूरानी ने ख़ुसूसी ख़िताब किया।

कुल हिंद मर्कज़ी रहमते आलम कमेटी के ज़ेरे एहतेमाम मुग़लपूरा प्ले ग्राउंड में जलसा शब्बे बरात मुनाक़िद हुआ जिस में शुमाली हिंद से ताल्लुक़ रखने वाले आलमे दीन उल्लामा मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद रईस उल-क़ादरी के अलावा उल्लामा मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद मुशर्रफ़ हुसैन कादरी ने शिरकत की। दोनों शहरों के मुख़्तलिफ़ मसाजिद को रोशनियों से मुनव्वर किया गया था।
तारीख़ी मक्का मस्जिद के अंदरूनी हिस्स्से में मौजूद फ़ानुस भी रोशन किए गए थे जिस से मस्जिद का अंदरूनी हिस्सा पुर नूर होगया था ।

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