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शरई उमूर में मुदाख़िलत की कोशिशें

हैदराबाद 04 सितंबर: मुस्लिम मुआशरा कई मसाइल से दो-चार है और एसे हालात में बाज़ नाम निहाद तंज़ीमें मुसलमानों के शरई उमूर में मुदाख़िलत की कोशिश कर रही हैं। ये तंज़ीमें दरअसल इस्लाम और मुसलमानों से बुग़ज़-ओ-इनाद रखती हैं लेकिन ख़ुद को उनके हमदरद के तौर पर पेश करते हुए ये तास्सुर दे रही हैंके शरई मुआमलात खास्कर निकाह और तलाक़ जैसे उमूर में तबदीलीयां लाई जानी चाहीए।

भारतीय मुस्लिम मोरचा , आंदोलन या संघटन के नाम पर ये तंज़ीमें काफ़ी सरगर्म हैं और नाम निहाद सर्वे के नाम पर ये रिपोर्ट पेश कर रही हैं के मुस्लिम ख़वातीन की अक्सरीयत तलाक़ के मौजूदा निज़ाम में तबदीली चाहती हैं। सबसे अहम बात ये हैके ये तंज़ीमें एसा कोई सर्वे नहीं करती और चंद एक अफ़राद से रब्त क़ायम करते हुए ये तास्सुर देती हैं के सारे मुल्क के मुसलमानों की राय पेश की जा रही है।

हाल ही में एक तंज़ीम ने इसी तरह की एक सर्वे रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया हैके मग़रिबी बंगाल , बिहार , झारखंड , महाराष्ट्रा और मुख़्तलिफ़ दुसरे रियासतों में बेशुमार ख़वातीन से तलाक़ मौजूदा निज़ाम के बारे में राय हासिल की गई।

अक्सरीयत ने ये राय दी कि इस तरीका-ए-कार में तबदीली लाई जानी चाहीए। हालाँकि शरई मुआमलात में किसी को भी मुदाख़िलत का कोई इख़तियार नहीं है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने ये वाज़िह मौक़िफ़ इख़तियार किया हैके इस्लामी अहकामात में किसी तरह की तबदीली या तरमीम नहीं की जा सकती और बहैसीयत मुस्लमान हम इन अहकामात को मन-ओ-एन तस्लीम करने के पाबंद हैं।
उन्होंने वाज़िह तौर पर कहा कि मुस्लमानों को एसी साज़िशों से चौकस रहना चाहीए क्युंकि ये मुस्लिम मुआशरे में तफ़र्रुक़ा पैदा करने की कोशिश है। यही नहीं बल्कि नाम निहाद मुस्लिम अफ़राद को मुबाहिसे के नाम पर मदऊ करते हुए इस्लाम की ग़लत तस्वीर पेश करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस्लाम मुकम्मिल निज़ाम हयात है और हम इस्लामी क़वानीन के पाबंद हैं। इस में किसी तरह की तबदीली का हमें कोई इख़तियार नहीं।

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