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शराबी शौहर ने बीवी के हाथ काट दिए

हैदराबाद, 30 जनवरी: अगर किसी के हाथ की उंगली निकल जाये तो दिल तड़प जाता है। अगर ऐसी सूरत में किसी के दोनों हाथ निकाल दिए जाएं और उसे अपने मासूम बच्चों के आगे बेबस और ज़ईफ़ माँ के आगे लाचार बना दिया जाये, ऐसे तसव्वुर ही से रूह काँप उठती है, ल

हैदराबाद, 30 जनवरी: अगर किसी के हाथ की उंगली निकल जाये तो दिल तड़प जाता है। अगर ऐसी सूरत में किसी के दोनों हाथ निकाल दिए जाएं और उसे अपने मासूम बच्चों के आगे बेबस और ज़ईफ़ माँ के आगे लाचार बना दिया जाये, ऐसे तसव्वुर ही से रूह काँप उठती है, लेकिन ये हक़ीक़त है कि समाज में ऐसे दरिन्दा सिफ़त इंसान मौजूद हैं, जो किसी भी ग़ैर इंसानी हरकत कर गुज़रने से नहीं कतराते।

ये एक ऐसी ख़ौफ़नाक-ओ-दर्दभरी दास्तान है, जो साहिली आन्ध्र के ज़िला गुंटूर में वाकेय् तेनाली में पेश आई, जहां एक दरिन्दा सिफ़त इंसान ने अपनी बीवी के दोनों हाथ काट दिए और उसे बे यार‍ ओ‍ मददगार छोड़ दिया, जिस उम्र में इस ख़ातून को जहां अपने बच्चों को कहानियां सुना कर छोटे छोटे लुक़मा बना कर ममता भरी डांट शफ़क्क़त भरी नज़र और मुहब्बत भरी गोद में बैठा कर खाना खिलाना था, वहीं इस ख़ातून की ज़िंदगी इस क़दर दर्दनाक हो गई है कि अब नन्हे नन्हे मासूम हाथ इसका पेट भर रहे हैं।

ये कहानी 21 साला शेख़ बीबी जान की है जो अपने शराबी शौहर के ज़ुल्म का इस क़दर शिकार हुई है कि वो अपनी ज़रूरत को ख़ुद पूरा करने के क़ाबिल नहीं। वो अपने रोते बिलकते बच्चों को दिलासा नहीं दे सकती। इसकी ममता की आह भरी चीख़ें सारे तनाली में गूंज रही हैं।

वो अपने बच्चों को खाना नहीं खिला सकती बल्कि बच्चे ही उसे खाना खिलाते हैं। वो रोने पर उनके ऑंसूं नहीं पहूंच सकती चूँकि इसके शौहर ने नशा की हालत में जहेज़ की मांग पूरी ना करने पर इसके दोनों हाथ काट दिए। परेशानकुन ज़िंदगी बसर कर रहे बच्चों को देख कर बीबी जान बेबसी के आलम में परेशान है। बीबी जान की शादी साल 2005 में तनाली टाउन के साकिन क़ासिम से हुई और उनके दो बच्चे एक लड़का और एक लड़की है।

क़ासिम शादी के दो साल बाद से अपनी हरकतों पर उतर आया। बीबी जान क़ासिम की दूसरी बीवी है। इसने जहेज़ के मुतालिबा के लिए बीवी को हरासाँ करना शुरू कर दिया और रोज़ाना किसी ना किसी बात पर झगड़ा करते हुए शेख़ बीबी जान को मारता था। इन दोनों ने पसंद से शादी की थी। क़ासिम की आदतों से बीबी जान तंग आ चुकी थी और इसने दो मर्तबा अपने शौहर की ख़ाहिश पर वालिदा से रक़म मांग कर दी थी।

ताहम दुबारा क़ासिम ने मुतालिबा शुरू कर दिया था। अपने शौहर की हरकतों से तंग आकर इस ख़ातून ने मायके का रुख़ किया जो पेशा से टेलर थी और क़ासिम की शागिर्द थी।

क़ासिम भी टेलरी किया करता था और एक सेंटर में टेलरिंग सिखाया करता था। इसी दौरान दोनों की पहचान हुई थी। घर छोड़ने पर क़ासिम ने अपनी बीवी को इंतिबाह दिया था कि वो जिस ज़ोर पर इसका मकान छोड़ रही है वो उसे तबाह कर देगा। इस बात का ख़ौफ़ ख़ुद बीबी जान को भी था और इसने तनालीत्रि टाउन पुलिस स्टेशन से मसला को रुजू किया था लेकिन पुलिस ने इस ख़ातून की दरख़ास्त पर संजीदगी का मुज़ाहिरा नहीं किया और इस बेबस ख़ातून की फ़रियाद को सुनी अन सुनी कर दी।

तनाली मौजूदा स्पीकर असेंबली मिस्टर एन मनोहर का हलक़ा है जो तनाली से नुमाइंदगी करते हैं। बीवी की हरकत पर ब्रहम क़ासिम ने एक साल क़बल 6 जनवरी 2012 को अचानक अपने ससुराल के मकान पहूँचा जो नींद की हालत में धुत था और इसने पहले अपने बच्चा पर हमला करना चाहा लेकिन बीवी को देख कर इस पर वार कर दिया।

क़ासिम ने अपनी बीवी शेख़ बीबी जान पर (कत्ता) हथियार से दो वार कर दिए और उसे ज़मीन पर ढेर कर दिया, जिसके बाद इस दरिन्दा सिफ़त इंसान ने इस बेबस ख़ातून को घसीटते हुए मकान की दहलीज़ तक ले गया और दहलीज़ पर हाथ रखते हुए एक के बाद एक दोनों हाथों को काट दिया और फ़रार हो गया।

ताहम पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया है और वो जेल में है लेकिन शेख़ बीबी जान की ज़िंदगी एक दर्दनाक अज़ाब से कम नहीं, जिस उम्र में बच्चों की ज़रूरीयात और वालिदा का सहारा बनना था वो ख़ुद वालिदा और बच्चों पर मुनहसिर हो गई है।

ज़ईफ़ वालिदा बेबसी के आलम में है। उनकी मआशी हालत भी काफ़ी कमज़ोर है। वो दो वक़्त पेट भर के खा नहीं सकते। शेख़ बीबी जान और इस के बच्चों की ज़रूरीयात को पूरा करना और गुज़र बसर का सामान फ़राहम करना ज़ईफ़ माँ की ज़िम्मेदारी है जो इस बोझ से कमज़ोर हो चुकी है।

बाहर मकान में मज़दूरी करना और फिर घर पहूंच कर अपनी लड़की का ख़्याल रखना इस ख़ातून के लिए अज़ाब बन गया है और कोई फ़र्द ख़ाह मर्द हो या ख़ातून कभी ख़ाब-ए-ग़फ़लत में नहीं चाहेगा कि ऐसे हालात इसके साथ पेश आएं। अल्लाह हम सब को उसे हालत से हिफ़ाज़त फ़रमाए और शेख़ बीबी जान उसकी वालिदा और बच्चों को उनके सब्र का बेहतरीन अज्र दुनिया-ओ-आख़िरत में अता फ़रमाए। ..आमीन (मुहम्मद अलीम उद्दीन)

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