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शरीयत में मुदाख़िलत संगीन चैलेंज

उज्जैन, 23 मार्च: मार्च (परवेज़ बारी) इस्लामी शरई क़वानीन में बढ़ती मुदाख़िलत को मुस्लिम उम्मा के लिए बहुत बड़ा चैलेंज क़रार देते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदर मौलाना सैयद मुहम्मद राबा हसनी नदवी ने मुसलमानों पर ज़ोर दिया कि

उज्जैन, 23 मार्च: मार्च (परवेज़ बारी) इस्लामी शरई क़वानीन में बढ़ती मुदाख़िलत को मुस्लिम उम्मा के लिए बहुत बड़ा चैलेंज क़रार देते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदर मौलाना सैयद मुहम्मद राबा हसनी नदवी ने मुसलमानों पर ज़ोर दिया कि वो तहत की अदालतों की जानिब से शरीयत में की जा रही मुदाख़िलत और इससे दरपेश चैलेंज्स का सामना करने के लिए मुत्तहिद और चौकन्ना हो जाएं ।

सैक्यूलर हिंदूस्तान के दस्तूर में दी गई ज़मानत के मुनाफ़ी ये अदालतें काम कर रही हैं । ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के 23 वीं कान्फ्रेंस से सदारती ख़िताब करते हुए मौलाना राबा हसनी नदवी ने कहा कि इस्लाम एक आला तरीन दीन है । मुसलमानों की अव्वलीन तर्जीह है कि वो फ़ाक़ाकशी कर सकते हैं लेकिन अपनी शरई क़वानीन में हरगिज़ मुदाख़िलत की इजाज़त नहीं देते ।

दस्तूर हिंद में मुसलमानों को किसी भी रुकावट के बगै़र अपने क़वानीन पर अमल करने की आज़ादी दी गई है । उन्होंने मुस्लिम उम्मा पर ज़ोर दिया कि वो इस्लाम की तालीमात और उसूलों पर सख़्ती से क़ायम रहें और अपनी हयात को शरई क़वानीन के ऐन मुताबिक़ बनाए ।

ख़ासकर ख़ानदानी मुआमलों में ग़ैर शरई उसूलों को ना अपनाए । इस्लाम के मुख़ालिफ़ीन को कोई ऐसा मौक़ा ना दें कि जिससे तन्क़ीद करने का मौक़ा मिल सके । शरीयत का तहफ़्फ़ुज़ हमारा अव्वलीन फ़रीज़ा है । इस काम के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने क़दम उठाए हैं ।

मुस्लिम उम्मा का फ़रीज़ा है कि वो शरीयत के तहफ़्फ़ुज़ में मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड से तआवुन करें । शरीयत और इस्लाम से मुताल्लिक़ ग़ैरमुस्लिम भाईयों के ज़हनों में पाए जाने वाले ग़लत तास्सुर को दूर करना और अपने एतराफ़ रौनुमा होने वाली सूरत-ए-हाल और तबदीलीयों पर नज़र रखना ज़रूरी है ताकि मुस्लिम तबक़ा दस्तूर हिंद में दी गई अपनी मज़हबी आज़ादी की ज़मानत से इस्तेफ़ादा करते हुए हमेशा चौकस-ओ-चौकन्ना रहें ।

अगर हम अपने मज़हबी उमूर की अंजाम दही के लिए चौकस रहें तो उन पर कोई पाबंदी आइद नहीं होगी । उन्होंने मज़ीद कहा कि मुसलमानों के लिए ज़रूरी है कि वो हमेशा चौकस-ओ-चौकन्ना रहें क्योंकि वो अक़लीयत में हैं और उनकी शनाख़्त एक मुस्लिम की हैसियत से की जाती है ।

यकसाँ सियोल कोड का मसला बाअज़ अफ़राद के ज़हनों में फिर से उठ सकता है लेकिन दस्तूर हिंद ने इस मुल्क के हर मज़हब को ये हक़ दिया है कि वो अपने तालीमात और उसूलों के मुताबिक़ अमल करें । शरीयत के मुताबिक़ ही अपने इदारे जात चलाए । मौलाना राबा हसनी नदवी ने उम्मत ए मुस्लिमा को ख़बरदार किया कि अपनी मज़हबी हुक़ूक़ की आज़ादी पर अमल करने के लिए हमें मुत्तहिद होना ज़रूरी है वरना सूरत-ए-हाल ऐसी पैदा की जा रही है जिससे उन के लिए शरीयत पर अमल करना मुश्किल हो जाएगा ।

हाल ही में हुकूमत ने कई ऐसे क़वानीन मंज़ूर किए हैं । बाअज़ क़वानीन की दफ़आत अक़लीयतों के मज़हबी आज़ादी पर कारी ज़रब हैं । हुकूमत की इन कोशिशों को नाकाम बनाने के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड अपनी तरफ़ से हर मुम्किना कोशिश कर रहा है ।

ऐसा मालूम होता है कि हुकूमत मुख़्तलिफ़ क़वानीन और बिलों के ज़रीया मुस्लिम क़वानीन में मुदाख़िलत करने की कोशिश कर रही है । इस तीन रोज़ा कान्फ्रेंस में हज़ारों अफ़राद शिरकत कर रहे हैं । मुलक भर से ख़ुसूसी मंदूबीन भी पहूंच चुके हैं । इजलास के दौरान मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदर की हैसियत से मौलाना राबा हसनी नदवी को मुत्तफ़िक़ा तौर पर मुंतख़ब किया जाएगा ।

मौलाना सैयद निज़ाम उद्दीन मौलाना वली रहमानी मौलाना ख़ालिद सैफुल्लाह के इलावा सैयद जलाल उद्दीन उमरी और दीगर ने पहले दिन के कान्फ्रेंस से ख़िताब किया । क़ब्लअज़ीं मौलाना हाफ़िज़ क़ारी मुहम्मद तक़ी ने ख़ैरमक़दमी ख़िताब किया और इस मौके पर उलमाए दीन की शिरकत को एक अज़ीम मौक़ा क़रार दिया ।

क़ारी अबदूस्सलाम की क़रा॔त कलाम ए पाक से जलसा का आग़ाज़ हुआ । जलसा में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के अरकान के इंतेक़ाल पर ख़ासकर हैदराबाद के मौलाना सुलेमान सिकन्दर डाक्टर अबदुल हक़ अंसारी जमात-ए-इस्लामी मौलाना सैयद हसनी नदवी मौलाना अबदुल्लाह हसनी नदवी के रिश्तेदारों को ताज़ियत पेश की गई ।

गुज़श्ता एक साल के दौरान इन तमाम हज़रात का इंतेक़ाल हुआ है जबकि अप्रैल 2012 में मुंबई में मुनाक़िदा बोर्ड के कनवेनशन में शरीक थे

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