शशि थरूर पर एक नयी मुसीबत

शशि थरूर पर एक नयी मुसीबत
कोचि, १४ नवंबर: ( एजेंसी) केरल हाईकोर्ट ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री (Minister of State for Human Resource Development) शशि थरूर के खिलाफ निचली अदालत में चल रहे कौमी तराना (राष्ट्रगान) के तौहीन के मामले में मुदाखिलत करने से इनकार कर दिया है।

कोचि, १४ नवंबर: ( एजेंसी) केरल हाईकोर्ट ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री (Minister of State for Human Resource Development) शशि थरूर के खिलाफ निचली अदालत में चल रहे कौमी तराना (राष्ट्रगान) के तौहीन के मामले में मुदाखिलत करने से इनकार कर दिया है।

जस्टिस एसएस सतीश चंद्रन ने थरूर की दरखास्त खारिज करते हुए यह हुक्म दिया। दरख्वास्त में एर्नाकुलम के इजाफी चीफ जोडीशील मजिस्ट्रेट की अदालत के राष्ट्रीय सम्मान संरक्षण अधिनियम 1971 की दफा 111 के तहत मुकदमा शुरू करने के हुक्म को थरूर ने चुनौती दी थी।

यह मामला 16 दिसंबर, 2008 का है। उस दिन फेडरल बैंक की ओर से मुनाकिद एक इजलास में कौमी तराना के दौरान थरूर ने लोगों से मुबय्यना तौर से अमेरिका की तर्ज पर दाहिना हाथ छाती पर रखने को कहा था। थरूर उस वक्त रुकन पार्लीमेंट थे।

थरूर की दरखास्त खारिज होने के बाद अब निचली अदालत में उनके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ सकेगी।

थरूर के खिलाफ यह मामला इंसानी हुकूक के तहफ्फुज़ मर्कज़ (Human Rights Protection Centre) के जनरल जाय कैथरथ की एक निजी शिकायत पर चलाया जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि थरूर के चलते कौमी तराना के गायन के दौरान होशियार ( Attention) रहना भंग हुई।

हाईकोर्ट में दी अपनी दरखास्त में थरूर ने बैंक की ओर से उस इजलास की रिकॉर्डेड सीडी को भी अदालत में पेश कराने की मांग की, जिसे बंच ( Bench/पीठ) ने खारिज कर दिया। बंच ( Bench/पीठ)ने कहा कि सुनवाई से पहले किसी दस्तावेज को बेगुनाही साबित करने के लिए अदालत में मंगवाने के लिए नहीं कहा जा सकता है।

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