शहरीयों का तहफ़्फ़ुज़ क़ौमी ज़िम्मेदारी , अक़वाम-ए-मुत्तहिदा वाज़िह मौक़िफ़ इख़तियार करे

शहरीयों का तहफ़्फ़ुज़ क़ौमी ज़िम्मेदारी , अक़वाम-ए-मुत्तहिदा वाज़िह मौक़िफ़ इख़तियार करे
अक़वाम-ए-मुत्तहिदा 11 नवंबर ।( पी टी आई ) आम शहरीयों के तहफ़्फ़ुज़ को क़ौमी ज़िम्मेदारी से ताबीर करते हुए हिंदूस्तान ने आज कहा कि बैन-उल-अक़वामी बिरादरी को चाहीए कि तशद्दुद से मुतास्सिरा हालात में लड़ाई में शामिल ग्रुपस के माबैन मुज़ाकर

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा 11 नवंबर ।( पी टी आई ) आम शहरीयों के तहफ़्फ़ुज़ को क़ौमी ज़िम्मेदारी से ताबीर करते हुए हिंदूस्तान ने आज कहा कि बैन-उल-अक़वामी बिरादरी को चाहीए कि तशद्दुद से मुतास्सिरा हालात में लड़ाई में शामिल ग्रुपस के माबैन मुज़ाकरात की राह हमवार की जायॆ।

इस के बरअक्स तहदीदात की धमकीयां और इक़तिदार में तबदीली के ज़रीया सूरत-ए-हाल को मज़ीद पेचीदा बनाने से गुरेज़ किया जाना चाहीए ।

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा में हिंदूस्तानी सफ़ीर हरदीप सिंह पूरी ने आज अक़वाम-ए-मुत्तहिदा सलामती कौंसल में आम शहरीयों के तहफ़्फ़ुज़ पर ब्यान देते हुए कहा कि अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के कई रुकन ममालिक आम शहरीयों के तहफ़्फ़ुज़ के नाम पर इक़तिदार की तबदीली केलिए वसाइल मुजतमा करने केलिए आमादा नहीं ।

उन्हों ने कहा कि किसी भी लड़ाई से दो-चार मुल्क में बैन-उल-अक़वामी मुदाख़िलत का फ़ैसला आम शहरीयों के तहफ़्फ़ुज़ की बुनियाद पर होना चाहीए और इस के पसेपर्दा सयासी मुहर्रिकात ना हॊ।

उन्हों ने कहा कि बैन-उल-अक़वामी बिरादरी और अक़वाम-ए-मुत्तहिदा सलामती कौंसल को चाहीए कि लड़ाई की सूरत में फ़रीक़ैन को मुज़ाकरात की मेज़ पर लाने की कोशिश की जाय और सयासी अमल के ज़रीया हालात को बेहतर बनाया जाय ना कि तहदीदात , इक़तिदार की तबदीली की धमकीयां देते हुए सूरत-ए-हाल को मज़ीद पेचीदा करदिया जायॆ। उन्हों ने इस बात की निशानदेही की कि जंग में आम आदमी बुरी तरह मुतास्सिर हो रहा है ।

उन्हों ने कहा कि हिंदूस्तान का ये नुक़्ता-ए-नज़र है कि आबादी का तहफ़्फ़ुज़ हर ममलकत की पहली और तरजीही ज़िम्मेदारी होनी चाहीए । उन्हों ने कहाकि आम शहरीयों के तहफ़्फ़ुज़ केलिए ताक़त का इस्तिमाल ही वाहिद रास्ता नहीं है बल्कि ये आख़िरी सूरत में इस्तिमाल किया जाने वाला रास्ता है और इस इख़तियार को तब ही इस्तिमाल किया जाय जब तमाम सिफ़ारती और सयासी कोशिशें नाकाम हो जाएं।

उन्हों ने कहा कि सलामती कौंसल को इस मुआमले में अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास करते हुए पहले ये फ़ैसला करना चाहीए कि आम शहरीयों के तहफ़्फ़ुज़ से मुराद किया है और वो वाज़िह मौक़िफ़ इख़तियार करे कि किन का तहफ़्फ़ुज़ किया जाय और किन से ख़तरात लाहक़ हैं।

Top Stories