Wednesday , August 15 2018

शहर और मज़ाफ़ात में हिन्दू धर्मा रखशा फ़ंड के नाम से अतयात की वसूली

नुमाइंदा ख़ुसूसी -फ़िर्क़ा परस्तों के बाइस हमेशा मुस्लमानों को ही नुक़्सान पहुंचा है । चाहे वो जानी एतबार से हो कि माली लिहाज़ से हरवक़त मासूम मुस्लमान ही अमन के इन दुश्मनों का सब से आसान निशाना रहे । फ़िर्कावाराना वाक़ियात से जहां

नुमाइंदा ख़ुसूसी -फ़िर्क़ा परस्तों के बाइस हमेशा मुस्लमानों को ही नुक़्सान पहुंचा है । चाहे वो जानी एतबार से हो कि माली लिहाज़ से हरवक़त मासूम मुस्लमान ही अमन के इन दुश्मनों का सब से आसान निशाना रहे । फ़िर्कावाराना वाक़ियात से जहां मुस्लमान मुतास्सिर होते रहे हैं वहीं आंधरा प्रदेश जैसी रियासत में मुस्लमानों को ओक़ाफ़ी जायदादों की तबाही की शक्ल में बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ा ।

तारीख़ी हक़ायक़ और ग़ैर जानिबदार क़ाइदीन-ओ-दानिश्वरों के तजज़िया के मुताबिक़ ओक़ाफ़ी जायदादों की तबाही-ओ-बर्बादी में आंधरा से ताल्लुक़ रखने वाले हुकमरानों और क़ाइदीन ने कोई कसर नहीं छोड़ी । हद तो ये है कि आज भी मुल़्क की फ़िकार्परस्त तंज़ीमें आंधरा वालों को अपना आला कार बनाकर पेश कररही हैं । इस की मिसाल हमें शहर और मज़ाफ़ाती इलाक़ों में आनधराई , होटलों , टिफिन सैंटरों में विश्वा हिन्दू परिषद आंधरा प्रदेश यूनिट की जानिब से रखे गए चंदे के बॉक्सों से मिलती है । मुस्लमानों के ख़िलाफ़ बरसर-ए-आम ज़हर अफ़्शानी करनेवाली वे एचपी के चंदा डिब्बे शहर और मुज़ाफ़ात में वाक़्य आनधराई होटलों में आसानी से देख सकते हैं । इस डिब्बों पर हिन्दू धर्मा रखशा फ़ंड , प्रिंट करवाया है ।

और अपने मक़ासिद में इस तंज़ीम ने जो सब से अहम मक़सद बताया है वो हिन्दुवों के दरमयान इत्तिहाद पैदा करना और हिन्दुवों की जानिब से मज़हब की तबदीली के जो वाक़ियात हो रहे हैं मसला हिन्दुवों के इस्लाम और ईसाईयत क़बूल करने को रोकने के साथ साथ साबिक़ा मज़हब हिन्दू अज़म में वापिस होने वालों की हौसलाअफ़्ज़ाई करना है । हमारे शहर के हिन्दू भाईयों के ज़हनों में फ़िर्कापरस्ती का ज़हर घोलने का ज़रीया बने ये डिब्बे ज़्यादा तर एन टी आर नगर , वनसथली पोरम , लिंगम पली , उप्पल और आनधराई अफ़राद के अक्सरीयती इलाक़ों में रखे गए हैं ।

कांच के इन गले नुमा डिब्बों में अच्छी ख़ासी रक़म यहां तक कि चेक्स भी वाज़िह तौर पर दिखाई दे रहे थे । ज़रूरत इस बात की है कि हुकूमत और क़ानून नाफ़िज़ करनेवाली एजैंसीयां अतयात की इसतरह वसूली के तरीका-ए-कार पर नज़र रखें । क्यों कि हाल ही में राजिस्थान में विश्वा हिन्दू परिषद के एक लीडर के घर पर धावा करते हुए 10 करोड़ रुपय की नक़द रक़म ज़बत की गई थी । जो हज़ार रुपय की नोटों की गडि्यों की शक्ल में थी । उन्हें फ़ौलादी सन्दुकों में छिपा कर रखा गया था । हुकूमत और क़ानून नाफ़िज़ करनेवाली एजैंसीयां इस बात का जायज़ा लें कि आख़िर ये चंदा कहां जा रहा है ।

इस रक़म का हिसाब किताब भी है या नहीं ? किया ये हमारे शहर में फ़िर्कावाराना माहौल पैदा करने के ख़ाहां तो नहीं ? पुलिस को चाहीए कि इन लोगों और इदारों पर कड़ी नज़र रखें जो इस तरह के डिब्बे अपने पास रखते हूँ । क़ारईन आज आंधरा वाले किस हद तक इस तंज़ीम की खु़फ़ीया तौर पर मदद का बाइस बन रहे हैं जहां तक वे एचपी का सवाल है मुस्लिम दुश्मनी इस के रग रग में सराएत कर गई है । इस तंज़ीम का क़ियाम 1964 में इसी मक़सद से अमल में आया था । इस तंज़ीम के लीडर ऐस ऐस आम्टे ने इस के मक़ासिद को बिलकुल वाज़िह करदिया और कहा कि हिन्दू अज़म को 3 बुरी नज़रों ईसाईयत , इस्लाम और कम्यूनिज़म से बचाना ही वे एचपी का अव्वलीन मक़सद है ।

क़ानून नाफ़िज़ करनेवाली एजैंसीयां विश्वा हिन्दू परिषद के इस तारीख़ी पस-ए-मंज़र को देखते हुए इन चंदों के डिब्बों के पीछे कारफ़रमा इस के मक़ासिद को बेनकाब करे क्यों कि मुल्क में हिन्दू दहश्तगरदों की गिरफ़्तारी के बाद बम धमाकों के वाक़ियात वक़ूअ पज़ीर नहीं हुए । हमारी इस ख़ुसूसी रिपोर्ट की तैय्यारी का मक़सद ये है कि आंधरा प्रदेश में जो अमन-ओ-अमान के लिए मुल्क में एक मिसाली रियासत समझी जाती है वहां इन फ़िर्क़ा परस्तों को अपने नापाक अज़ाइम की तकमील का मौक़ा नहीं दिया जाना चाहीए । इस ज़िमन में पुलिस और क़ानून नाफ़िज़ करनेवाली एजैंसीयां ही अहम रोल अदा करसकती हैं ।।

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