Monday , December 18 2017

शहर में चार माह में ट्रैफिक पुलिस के 373432 ई चालान

शहर हैदराबाद की ख़ूबसूरती , नज़म-ओ-ज़बत , यहां की सड़कें , साफ़ सफ़ाई के इंतिज़ामात , सेहत आम्मा की सहूलयात-ओ-ख़ुशहाली एसा लगता है कि तारीख के औराक़ में कहीं गुम होगए हैं ।

शहर हैदराबाद की ख़ूबसूरती , नज़म-ओ-ज़बत , यहां की सड़कें , साफ़ सफ़ाई के इंतिज़ामात , सेहत आम्मा की सहूलयात-ओ-ख़ुशहाली एसा लगता है कि तारीख के औराक़ में कहीं गुम होगए हैं ।

इस के बरअक्स आज पुराना शहर हैदराबाद टूटी फूटी सड़कों , नाक़िस बलदी इंतिज़ामात , बुनियादी सहूलतों के फ़ुक़दान , बच्चा मज़दूरों की कसरत , तंग-ओ-तारीक , स्कूलों के हामिल एक पसमांदा शहर में तब्दील हो चुका है ।

शहर की इस हालत-ए-ज़ार के लिए कौन ज़िम्मेदार है । इस बारे में बड़े ग़ौर-ओ-फ़िक्र की ज़रूरत है। कभी पुराना शहर में सरकारी क्लिनिक्स हुआ करते थे । सरकारी स्कूलों की वसीअ-ओ-अरीज़ इमारतें पुरफ़िज़ा तालीमी माहौल की गवाही देती थीं । सफ़ाईके बहतरीन इंतिज़ामात से शहर सरसब्ज़-ओ-शादाब रहा करता था ।

तफ़सीलात के मुताबिक़ ट्रैफिक पुलिस ने शहर में जारीया साल जून और सितंबर के दरमियान जुमला2,73,432 ई चालानत जारी किए । सब से ज़्यादा ई चालान जारी करने का एज़ाज़ ( यानी अवाम की जेबें ख़ाली करने का कारनामा ) आसिफ़ नगर ट्रैफिक पुलिस ने अंजाम दिया ।

इस ने चार माह के दौरान 37,299 ई चालान जारी किए । फ़लक नुमा ट्रैफिक पुलिस 30840 चारमीनार ट्रैफिक पुलिस 29889 और मीर चौक ट्रैफिक पुलिस ने 20614 ई चालान जारी करते हुए दूसरा तीसरा और चौथा मुक़ाम हासिल किया ।

ताहम(फिर भी) ट्रैफिक मसाइल से दो चार नए शहर में पुराना शहर की बनिसबत बहुत कम चालान किए गए । बंजारा हिलज़ ट्रैफिक पुलिस ने जून और सितंबर के दौरान 8013 , महा निकाली पुलिस ने 11894 , बेगम पेट 12556 , पंजा गट्टा 10037 , सैफ आबाद 10604 ई चालान जारी किए ।

उन आदाद-ओ-शुमार को देखने से अंदाज़ा होता है कि पुराना शहर में ट्रैफिक पुलिस ने कुछ ज़्यादा ही सरगर्मी का मुज़ाहरा किया है । आप को बतादें कि महा निकाली ट्रैफिक पुलिस के यहाँ 36 डीजीटल कैमरे हैं ।

इसी तरह बेगम पेट ट्रैफिक पुलिस 38 , सैफ आबाद 41, पंजा गट्टा 41, आसिफ़ नगर ट्रैफिक पुलिस 35 , चारमीनार 33 , फ़लक नुमा 29 , मीरचोक 29 , आम लोगोंकी शिकायत है कि कई मुक़ामात पर तो पुलिस रक़म हासिल करलेती है लेकिन रसीद नहीं देती।

बुज़ुर्गों के ख़्याल में जुर्माने तो वसूल किए जाते हैं लेकिन पुराना शहर में किसी किस्म की सहूलत फ़राहम नहीं की जाती । हुकूमत और ओहदेदार इस से सौतेला सुलूक करते हैं ।

बदक़िस्मती ये हैकि हुकूमत या ओहदेदारों की जानिबदारी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाला यहां कोई नहीं है ।

TOPPOPULARRECENT