Sunday , December 17 2017

शहर में 30 हज़ार गरीबों को सोने के लिए जगह नहीं!

शहर हैदराबाद की आबादी में लगातार इज़ाफ़ा होता जा रहा है और दीगर रियासतों और अज़ला से भी लोग रोज़गार की तलाश में इस तारीख़ी शहर का रुख़ कर रहे हैं । सुप्रीम कोर्ट की हिदायत के बाद जी एच एम सी ने दो हफ़्तों तक एक सर्वे करवाया जिस के बाद

शहर हैदराबाद की आबादी में लगातार इज़ाफ़ा होता जा रहा है और दीगर रियासतों और अज़ला से भी लोग रोज़गार की तलाश में इस तारीख़ी शहर का रुख़ कर रहे हैं । सुप्रीम कोर्ट की हिदायत के बाद जी एच एम सी ने दो हफ़्तों तक एक सर्वे करवाया जिस के बाद एलान किया गया कि शहर में सिर्फ़ 4600 लोग ही बेघर हैं जो सड़कों फुट-पाथों रेलवे स्टेशनों , पार्क्स , शॉप्स के बाहर राहदारियों , बस स्टैंड्स वगैरह में शब बसरी करते हैं ।

आप को बतादें कि दारुल हुकूमत दिल्ली की 17 मिलियन आबादी है जिस में से 2.5 लाख लोगों के पास रहने के लिए कोई आसरा नहीं । हुकूमत ने 150 शेल्टर्स क़ायम किए जिस में सिर्फ़ 9000 लोगों की गुंजाइश है ।
जब कि इन शेल्टर्स पर सालाना 70 मिलियन रुपये के मसारिफ़ आते हैं और दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड 56 मुक़ामी एन जी ओज़ को माहाना फी कस 31600 रुपये अदा करता है हैदराबाद में भी इसी काम में गैर सरकारी तंज़ीमों को शामिल करने की ज़रूरत है।

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