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शहाब साक़िब क़ुदरत का करिश्मा : साईंसदाँ

मास्को, 17 फरवरी : ( एजेंसी ) : रूस के वस्त में ओरल की पहाड़ियों पर शहाब साक़िब (उल्का पिंड/Meteorites) की बारिश को साईंसदानों ने क़ुदरत का करिश्मा तस्लीम किया है । 10 टन वज़नी शहाब साक़िब (Meteorites) 54 हज़ार किलो मीटर की रफ़्तार से ज़मीन की तरफ़ पहूँचा और ज़म

मास्को, 17 फरवरी : ( एजेंसी ) : रूस के वस्त में ओरल की पहाड़ियों पर शहाब साक़िब (उल्का पिंड/Meteorites) की बारिश को साईंसदानों ने क़ुदरत का करिश्मा तस्लीम किया है । 10 टन वज़नी शहाब साक़िब (Meteorites) 54 हज़ार किलो मीटर की रफ़्तार से ज़मीन की तरफ़ पहूँचा और ज़मीन की सतह से 50 किलो मीटर की बुलंदी पर ही वो टुकड़े टुकड़े हो कर गिर पड़ा । शहाब साक़िब (Meteorites) की बारिश से अगरचे कि कोई ख़ास जानी नुक़्सान नहीं हुआ लेकिन बर्तानवी माहिर फ़लकियात मोनीका गिरेज़र ने उसे बनी नौ इंसान के लिये एक तारीख़ी वाक़िया क़रार दिया ।

इनका कहना है कि मेरा साईंसी ज़मीर ये ख़्याल करता है कि वाक़ई ये क़ुदरत के इन करिशमात में से एक है जिसकी पेशनगोई एक इंसान नहीं कर सकता । इनका कहना है कि अगर इन शिहाबियों के टुकड़े मिल जाएं तो हमें मालूम नहीं कि हम क्या दरस हासिल कर पाएंगे । शहाब साक़िब ने लाखों किलो मीटर का सफ़र तए किया है ।

उनकी उम्र 4.5 अरब साल है । कुर्राह-ए-अर्ज़ का कोई पत्थर इतना पुराना नहीं जितने शहाब साक़िब (Meteorites) हमारे लिये अजनबी है । इस नादिर फ़लकियाती वाक़िया के 24 घंटे बाद कुर्राह-ए-अर्ज़ को एक सयारचा से होने वाला ख़तरा टल गया । सयारचा ज़मीन के इंतिहाई करीब से गुज़रा साईंसदानों का कहना है कि ये सयारचा अगर ज़मीन से टकरा जाता तो भयानक तबाही आ जाती ।

50 मीटर बड़ा और कई टन वज़नी सयारचा ज़मीन से सिर्फ़ 17 हज़ार 150 मील के फ़ासले से गुज़र गया । अगर ज़मीन पर गिरता तो 25 लाख टन बम धमाका के मुमासिल तबाही होती । जो हीरोशीमा पर गिराए जाने वाले एटम बम से सैंकड़ों गुना ज़्यादा होती । इस दौरान रूस में शहाब साक़िब (Meteorites) के टुकड़ों की बारिश से 1000 से ज़्यादा अफ़राद ज़ख़्मी हुए, इमदादी कार्यवाहियो के लिए सैंकड़ों अफ़राद पर मुश्तमिल टीम रवाना हो गई।

हुक्काम के मुताबिक़ ख़ला में शहाब साक़िब का कई टन वज़नी टुकड़ा चलयाबरनसक शहर (city of Chelyabinsk,) के ऊपर फटा जिसके बाद धमाके से शहर में हलचल मच गई। आग का गोला 1500 किलो मीटर की रफ़्तार से आया और अपने पीछे सफेद रोशनी छोड़ गया।

अलार्म बज उठे,इमारतों और मकानात के शीशे टूटे। क़ुदरत के इस अनोखे मुज़ाहिरे में एक हज़ार से ज़ाइद अफ़राद ज़ख़्मी हो चुके हैं। फ़िल्मी अंदाज़ के इस मंज़र को कई मील दूर से भी देखा गया।

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