Tuesday , December 19 2017

“शांत मन से वाहन चलाने” के संदेश के साथ दिल्ली में आयोजित हुई बाइक रैली

नई दिल्ली: विश्व मानसिक दिवस के सिलसिले में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता कायम करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज बाइक रैली का आयोजन किया गया जिसमें 70 से अधिक मोटर साइकिल चालकों ने हिस्सा लिया।

हैरले डेविडसन, ड्काटी, केटीएम, कावासाकी, ट्राइम्प और राॅयल इनफील्ड जैसी मोटर बाइकों पर सवार इन वाइकरों ने आज सुबह राजधानी की विभिन्न सड़कों से गुजरते हुए मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता कायम की।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के सिलसिले में इस मोटर बाइक रैली का आयोजन सीआईएमबीएस के सामाजिक जागरूकता अभियान ‘‘इंडिया फाॅर मेंटल हेल्थ’’ तथा राइडर्स प्लैनेट की ओर से किया गया। इस रैली के जरिए अगले महीने भारत में पहली बार आयोजित हो रही डब्ल्यूएफएमएच विश्व मानसिक स्वास्थ्य कांग्रेस के आयोजन का आगाज भी किया गया।

इस रैली में सुपर बाइकरों, मानसिक स्वास्थ्य विषेशज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं आदि ने हिस्सा लिया। इस रैली के जरिए लोगों को ‘‘षांत मन से वाहन चलाने’’ का संदेश भी दिया गया।

गौरतलब है कि विष्व मानसिक दिवस का आयोजन हर साल 10 अक्तूबर को होता है। इस साल के विश्व मानसिक दिवस का संदेष है – कार्यस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य।’’

इस मौके पर डब्ल्यूएफएमएच विश्व मानसिक स्वास्थ्य कांग्रेस के आयोजन अध्यक्ष डाॅ. सुनील मित्तल ने कहा, ‘‘आज के समय में रोड रेज की बढ़ रही घटनाओं का संबंध मानसिक तनाव से भी है। हम सड़कों पर किस तरह से वाहन चलाते हैं और किस तरह का व्यवहार करते हैं यह हमारी मानसिक स्थिति पर भी निर्भर है। हमारा फ्रस्ट्रेशन एवं मानसिक तनाव अक्सर रोड रेज के रूप में सामने आता है। हालांकि ज्यादातर वाहन चालक यह नहीं मानते हैं कि वे गुस्सैल प्रवृति के हैं लेकिन इसके बावजूद वाहन चालकों में से करीब 50 प्रतिशत वाहन चालक सड़कों पर वाहन चलाने के दौरान किसी न किसी वक्त में या किसी न किसी रूप में रेड रोज से प्रभावित होते हैं। इस बाइक रैली के जरिए उम्मीद है कि हम मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा सकेंगे।’’

मोटर बाइक चलाने का शौक रखने वाले सीआईएमबीएस के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डाॅ. समीर कलानी ने कहा, ‘‘हम साकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य एवं सड़कों पर सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एकत्रित हुए हैं क्योंकि स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन के लिए ये दोनों जरूरी हैं। लगातार तनाव कायम रहने का असर हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सेहत पर भी पड़ता है जिसकी परिणति डिप्रेशन, एंग्जाइटी, क्रोध, षराब की लत तथा खराब कार्यकुषलता एवं खराब जीवन शैली के रूप में होती है। आज की बाइक रैली में हमने लोगों को ‘‘शांत मन के साथ वाहन चलाने’’ का संकल्प लेते हुए देखा। शांत मन से वाहन चलाने पर हम अपना ध्यान बेहतर तरीके से केन्द्रित कर पाते हैं जिससे दुर्घटना होने की आषंका बहुत कम होती है।’’

दिल्ली की मनोचिकित्सक डाॅ. शोभना मित्तल ने कहा कि पिछले छह वर्षों में दिल्लीवासियों को सड़क जाम में फंसकर दोगुना समय बर्बाद करने को मजबूर होना पड़ता है जो रोड रेज तथा मानसिक तनाव का कारण है। समय पर दफ्तर या अन्य जगह पहुंचने की आपाधापी में लोग मानसिक तनाव से गुजरते हैं और यह तनाव दफ्तर एवं घर में भी बना रह सकता है। सड़कों पर मानसिक तनाव के साथ वाहन चलाने के कारण दुर्घटना होने की आशंका कई गुना बढ़ती है।

इस मौके पर वरिष्ठ मनोचिकित्सक डाॅ. नीलम कुमार बोहरा ने कहा कि आज जीवन के हर क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है जिसके कारण कार्यस्थलों पर मानसिक तनाव बढ़ रहा है। इस प्रतिस्पर्धा के कारण लोगों में डिप्रेषन भी बढ़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार आज पांच में से एक व्यक्ति अपने जीवन में किसी न किसी मुकाम पर डिप्रेशन से ग्रस्त होते हैं लेकिन मानसिक समस्याओं को लेकर समाज में कायम भ्रांतियों के कारण लोग अपनी मानसिक समस्याओं को छिपाते हैं, जबकि इन समस्याओं का सही समय पर सही इलाज होना चाहिए। ऐसे में यह जरूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में कायम भ्रांतियों को दूर किया जाए तथा समाज में जागरूकता कायम की जाए।

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