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शादीयों में शरई तरीक़ा, तलाक़ और ख़ुला के लिए अदालतों का इंतिख़ाब ताज्जुबख़ेज़

हिंदुस्तान बिलख़सूस हमारी रियासत के मुस्लिम मुआशरा में तलाक़ और ख़ुला के वाक़ियात में बेतहाशा इज़ाफ़ा हो रहा है जो मुसलमानों के लिए एक लम्हा फ़िक्र है। इन वाक़ियात का अफ़सोसनाक पहलू ये हैकि मियां बीवी के झगड़ों और मसाइल को शरीयत के मु

हिंदुस्तान बिलख़सूस हमारी रियासत के मुस्लिम मुआशरा में तलाक़ और ख़ुला के वाक़ियात में बेतहाशा इज़ाफ़ा हो रहा है जो मुसलमानों के लिए एक लम्हा फ़िक्र है। इन वाक़ियात का अफ़सोसनाक पहलू ये हैकि मियां बीवी के झगड़ों और मसाइल को शरीयत के मुताबिक़ हल करने की बजाय हम अपनी ही शरीयत पर अमल करने से गुरेज़ करते हैं और झगड़ों को सेक्यूलर अदालतों में घसीटा जाता है और ये अमल मुसलमानों के लिए बड़ी बदबख़्ती की बात है।

मुस्लिम मुआशरा को इस बदबख़्ती,शरई क़्वानीन की बेहुर्मती के गुनाह से बचाने के लिए रियास्ती वक़्फ़ बोर्ड में दारुल क़ज़ा की तर्ज़ पर एक ऐसा सेंटर क़ायम किया जाये जो मज़लूम ख़्वातीन को दादर्स करते हुए उन्हें फ़ौरी इंसाफ़ दिलाए। इन ख़्यालात का इज़हार रियास्ती महकमा अक़लीययती बहबूद के स्पेशल सेक्रेट्री जनाब उमर जलील आई ए एस ने किया।

वो सदाए हक़ शरई कौंसिल हैदराबाद के ज़ेरे एहतेमाम मदीना एजूकेशन सेंटर नामपल्ली में मुनाक़िदा ख़ुसूसी इजलास से ख़िताब कर रहे थे, जिस का उनवान ‘अगर शौहर खुला पर रज़ामंद ना हों तो बीवी को अक़्दे निकाह से आज़ादी की सूरत क्या है’ रखा गया था। इस इजलास में ऐसी ख़्वातीन की कसीर तादाद शरीक थी जो अपने शौहरों की ज़ुल्म और बरबरीयत से आजिज़ आकर ख़ुला लेने पर मजबूर हो गईं लेकिन उन के ज़ालिम शौहरें खुला पर रज़ामंद नहीं हैं।

जनाब उमर जलील ने अपने फ़िक्र अंगेज़ ख़िताब में मज़ीद कहा कि वक़्फ़ बोर्ड में एक ऐसा इदारा क़ायम किया जाये जिस के ज़रीए मियां बीवी के आपसी झगड़ों और तलाक़ और ख़ुला के मसाइल हल किए जा सकें और इस इदारा या कौंसलिंग सेंटर में उल्मा, दानिश्वरों और माहिरीने क़ानून के इलावा ख़्वातीन को भी शामिल किया जाये।

इस ज़िमन में जो कुछ भी तजावीज़ मौसूल होंगी इस पर महकमा अक़लीययती बहबूद ज़रूर ग़ौर करेगा। स्पेशल सेक्रेट्री महकमा अक़लीययती बहबूद ने मज़ीद कहा कि वक़्फ़ बोर्ड के तहत मज़लूम ख़्वातीन की क़ानूनी इमदाद के लिए लीग ऐड सेल और तलाक़ और ख़ुला के मुआमलात की यक्सूई के लिए कौंसलिंग सेंटर उल्मा के मश्वरा और उन की सरपरस्ती में क़ायम करने की तजवीज़ है और उन तजावीज़ को वो हुकूमत के सामने पेश करेंगे।

मुस्लिम मुआशरा में तलाक़ और ख़ुला के वाक़ियात में इज़ाफ़ा पर तशवीश ज़ाहिर करते हुए उमर जलील ने कहा कि पहले तलाक़ के वाक़ियात सुनने में नहीं आते थे लेकिन अब ये हाल हो गया कि शादी के तीन माह छः माह या एक साल में ही बात तलाक़ तक पहुंच रही है।

उन्होंने बाअज़ क़ाज़ीयों की जानिब से कॉन्ट्रैक्ट मैरेजेस करवाने की इत्तिलाआत पर कहा कि वक़्फ़ बोर्ड एक ऐसा मेकानिज़म तैयार करेगा जिस के ज़रीए ऐसी हरकतों में मुलव्विस क़ाज़ीयों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। इब्तिदा में सदाए हक़ शरई कौंसिल के सदर जनाब मुईन उद्दीन ने मेहमानों का ख़ैर मक़दम किया जबकि महफ़िल के रूहे रवां मुहम्मद रफ़ी उद्दीन ने कार्रवाई चलाई। [email protected]

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