शादी का वादा कर रोहिंग्या लड़कियों को बेचा जा रहा है : एक रिपोर्ट

शादी का वादा कर रोहिंग्या लड़कियों को बेचा जा रहा है : एक रिपोर्ट
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15 साल की उम्र में राहेमा ने म्यांमार के एक राज्य में अपना घर छोड़ दी, दो अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार करवा कर भारत में एक आदमी से शादी करने के लिए बेच दिया गया, जो उम्र में उसके पिता से कुछ साल कम था। राहेमा ने थॉमसन रायटर फाउंडेशन को बताया कि “एजेंट ने मुझे 20,000 रुपये में खरीदा था। विवाहित महिलाओं को 15,000 रुपये मिलते हैं, “राहेमा, जिसने सिर्फ अपना नाम ही बताई थी।

वह बोली “वह मेरे पिताजी की तुलना में सिर्फ थोड़े ही छोटे थे … उसने मुझे बिजली के तारों से मारा करता था और मुझे कहीं भी जाने नहीं दिया जाता था, वह बोली , उसने मुझे खरीदा था,”। रहिमा जो रोहंग्या मुसलमान हैं और म्यांमार से पलायन कि है। दलालों ने उसे शादी के नाम पर एक एजेंट को बेच दिया था।

राहेमा के पति ने पिछले साल पांच साल तक यौन शोषण करने के बाद उसे छोड़ दिया था। वह अपने दूसरे बच्चे के साथ पांच महीने की गर्भवती थी। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) ने पहले ही कहा था कि अधिकतर रोहंग्या महिलाएं और बच्चों को मानव तस्करी का खतरा हैं, लेकिन इस मामले में अभी तक बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

रहिमा ने 2012 में बांग्लादेश में एक शरणार्थी शिविर में अपने पिता से मिलने के लिए म्यांमार में अपना घर छोड़ी थी। लेकिन शिविर में उसकी चाची ने ही उसे एजेंट को बेच दिया, उसे बताया गया कि वह उसे शादी कर लेगा इंडिया में। राहिमा बोली “मैं शादी के विचार से खुश थी मैं एजेंट के साथ कोलकाता पहुंची। मुझे कोई भारतीय भाषा का ज्ञान नहीं था, लेकिन मैं सोची मैं यहाँ सुरक्षित रहूंगी।

बांग्लादेश की अराजक शरणार्थी शिविर ऐसे एजेंटों के लिए बहुत उपयुक्त क्षेत्र है, जहां राहेमा जैसी कितनी लड़कियों को बेच दिया जाता है। विवाह का वादा लड़कियों को लुभाने के लिए शिविरों में कार्यरत तस्करों के लिए एक विशिष्ट तरीका है। सहायता और विकास संगठन के प्रवक्ता नवाज ने कहा, “युवा लड़कियों और माता-पिता के लिए शादी बड़ी बात है क्योंकि उनकी बेटियों के लिए यह बेहतर रूप में देखते हैं।”

दिसंबर में, बीआरएसी स्वयंसेवकों ने कॉक्स बाजार में शरणार्थी बस्तियों में युवा लड़कियों को कई अजनबियों के बीच सुरक्षित रहने के बारे में जानकारी दिया गया था। नवाज ने कहा “इन लड़कियों में से कई इतने सारे पुरुषों के आसपास कभी नहीं रहे हैं वे कई नए लोगों से मिल रहे हैं। लड़कियों को 12 सेशन में प्रशिक्षित किया जाता है, जिनके लिए उन्हें ध्यान से देखने की ज़रूरत होती है – गलत तरीके से छूने, पैसे की पेशकश या भोजन और आश्रय, और वास्तविक मानवीय श्रमिकों और तस्करों के बीच अंतर करने के तरीकों को बताया जाता है। नवाज ने कहा “लड़कियां गायब होने की घटनाएं आम है … उन्हें भारत और नेपाल में अवैध व्यापार किया जा रहा है। हमने इस जोखिम को कम करने के लिए इस कार्यक्रम को लॉन्च किया, “।

भारत में सीमा के पार, लड़कियों को शादी का झांसा देकर बेचा जा रहा है और यह सरगना धीरे-धीरे उभर रहे हैं। भारत, बांग्लादेश और म्यांमार में काम करने वाले एक एनजीओ संस्थापक हसीना खर्भीह ने कहा कि यह समूह अपने परिवारों के साथ भारत में 15 रोहिंग्या लड़कियों के पुनर्मिलन पर काम कर रहा है। उन्होंने थॉमसन रायटर फाउंडेशन को बताया “इन लड़कियों को यौन दासता के लिए या छह से आठ साल पहले शादी के नाम पर भारत में बेचा गया था। उन्होने कहा “हम म्यांमार में उसके परिवारों का पता लगाने में असमर्थ हैं, इसलिए हम उनमें से किसी को वापस घर भेजने में सफल नहीं हुए हैं।”

हसीना खर्भीह बांग्लादेशी शरणार्थी शिविरों में पिछले छह महीनों में पांच ऐसे परिवारों से मिली जहां वे कहते हैं कि वे भारत में अवैध तस्करी हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि भारत में बिक रहे लड़कियों के मामले अधिक हैं, लेकिन उन्हें पहचानने में चुनौतियां हैं।

“भाषा कि वजह से उन्हें रोहंग्या या बांग्लादेशी के रूप में पहचानना मुश्किल है क्योंकि भाषा बहुत समान है,” एडमिरल फिलिप्स ऑफ जस्टिस एंड केयर ने कहा, यह एक गैर-मानव तस्करी एनजीओ है। लगभग 17,000 रोहिंगिया शरणार्थियों और शरण लेने वाले भारत में यू.एन. शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर के साथ पंजीकृत हैं और कई लोग, जैसे राहेमा, पहचान के साक्ष्य के रूप में एक शरणार्थी कार्ड के लिए अपना आवेदन स्वीकार करते हुए यूएनएचसीआर के पत्र का उपयोग करते हैं। यूएनएचसीआर के अधिकारियों ने हालांकि, कहा, न तो उन्होंने और न ही उनके सहयोगी संगठनों ने रहेमा के जैसा मामला दर्ज किया था।

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