Tuesday , December 12 2017

शादी में एक खाना एक मीठा मुहिम का सरपुरटाउन में असर

तेलंगाना अवाम और ख़ुसूसन मुस्लिम अक़लियतों, एडीटर रोज़नामा सियासत ज़ाहिद अली ख़ां की शख़्सियत, अवामी फ़लाह-ओ-बहबूद से मुताल्लिक़ उमोर में मिसाली-ओ-मुनफ़रद होचुकी है।

तेलंगाना अवाम और ख़ुसूसन मुस्लिम अक़लियतों, एडीटर रोज़नामा सियासत ज़ाहिद अली ख़ां की शख़्सियत, अवामी फ़लाह-ओ-बहबूद से मुताल्लिक़ उमोर में मिसाली-ओ-मुनफ़रद होचुकी है।

क्युंकि हमेशा मुसलमानों की फ़लाह-ओ-बहबूद के तरक़्क़ीयाती कामों और मुसलमानों के मसाइल की यकसूई करने के लिए ज़ाहिद अली ख़ां हमेशा फ़िक्रमंद रहते हैं और ज़्यादा से ज़्यादा अमल आवरी करते हुए हज़ारों मुसलमानों और तलबा को इस्तेफ़ादा करने का मौक़ा अता किया है।

उन्होंने तालीमी, समाजी, दीनी, पेशावाराना, तिब्बी, स्कालरशिपस के अलावा शोबाजात से मुताल्लिक़ किताबों की इशाअत के ज़रीये मुसलमानों को तरक़्क़ी और रोज़गार फ़राहम करने का अहम ज़रीया अता किया है। ज़ाहिद अली ख़ां ने मुसलमानों के लाखों रूपियों जो इसराफ़ के नाम पर ख़र्च होरहे थे, उसकी बचत के लिए अब एक नई तहरीक और मुहिम शुरू की है जोकि मुसलमानों की शादीयों में सादगी से शादगी में एक खाना और एक मीठा का आग़ाज़ किया है।

जिस का मुसलमानों के हर घर से ख़ौरमक़दम किया जा रहा है और शहरों में कई अफ़राद साहिब हैसियत रहने के बावजूद अपनी लड़कीयों की शादियां सादगी से अंजाम देते हुए ज़ाहिद अली ख़ां की अपील पर लब्बैक कह रहे हैं।

और लड़के वालों की तरफ़ से भी वलीमा तक़रीब में एक खाना और एक मीठा रखा जा रहा है इस तरह से ज़ाहिद अली ख़ां की तहरीके का असर शहरों से लेकर देही इलाक़ों तक होरहा है जिस की मिसाल सरपुरटाउन है और ये तहरीक दिन बह दिन देही इलाक़ों में भी ज़ोर पकड़ रही है।

सरपुर टाउन ताल्लुक़ा क़दीम ताल्लुक़ा और तेलंगाना रियासत का आख़िरी पसमांदा इलाके कहलाता है जोकि रियासत महाराष्ट्रा का सरहदी इलाके कहलाता है। यहां सरपुरटाउन के मुतवत्तिन वज़ीफेयाब हेडमास्टर और क़ारी सियासत ख़ुरशीद अली ख़ान के फ़र्ज़ंद माजिद अली ख़ान की शादी अकबर ख़ान साबिक़ मुंसिपल कौंसिलर की दुख़तर के साथ 22 अप्रैल को अंजाम पाई और वलीमा तक़रीब सर पुरटाउन के ज़ीशान गार्डन फंक्शन हाल में बड़ी सादगी के साथ अमल में आई।

इस वलीमा तक़रीब में एक खाना और एक मीठा तहरीक सियासत और ज़ाहिद अली ख़ां की अपील पर सरपुरटाउन में लब्बैक कहा गया। इस मौके पर जाविद अली ख़ान ने मुसलमानों से अपील की के इस तरह की तक़रीब को आम करें और ग़ैर ज़रूरी अख़राजात से इजतेनाब की मुस्लिम अक़लियतों से की।

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