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शादी से पहले किया, तो बन जाएंगे…….

नई दिल्ली, 18 जून: मद्रास हाई कोर्ट ने कुछ ऐसा कह दिया है, जो आने वाले वक्‍त में प्री-मेरिटल सेक्स की मिथ को नया मोड़ दे सकता है।

नई दिल्ली, 18 जून: मद्रास हाई कोर्ट ने कुछ ऐसा कह दिया है, जो आने वाले वक्‍त में प्री-मेरिटल सेक्स की मिथ को नया मोड़ दे सकता है।

मद्रास हाई कोर्ट ने कहा ‌कि अगर कोई गैर शादी शुदा जोड़ा बालिग है और उन दोनों के बीच जिंसी ताल्लुक बनते हैं, तो इसे जायज़ शादी माना जाएगा और उन दोनों को शौहर बीवी कहलाने का हक होगा।

अदालत का कहना है कि अगर किसी कुंवारे लड़के की उम्र 21 साल से ज्यादा है और लड़की 18 साल की उम्र पार कर चुकी है, तो उन्हें आइन ( संविधान) की ओर से मिली चुनने की आजादी हासिल है।

अगर ऐसा कोई जोड़ा जिंसी खाहिशात को पूरा करने के‌ लिए कदम बढ़ाता है, तो इसके नतीजों को कुबूल करते हुए यह मुकम्मल अज़्म (Full commitment) माना जाएगा। हालांकि, कुछ मामलों में इस्तिस्ना (Exception) जरूर हो सकता है।

हाई कोर्ट के मुताबिक मंगलसूत्र बांधना, वरमालाएं पहनाना या अंगूठी बदलने जैसे मज़हबी रीति-रिवाज सिर्फ इन नियमों को पूरा करने और समाज को मुतमईन करने के लिए हैं।

यह भी कहा कि ऐसे रिश्ते में शामिल कोई भी फरीकैन फेमिली कोर्ट जाकर जिंसी ताल्लुक होने से जुड़ा दस्तावेज जमा कर शादी का दर्जा हासिल कर सकता़ है। इस ऐलान के बाद कोई भी लड़की सरकारी रिकॉर्ड में खुद को उस शख्स की बीवी करार दे सकती है।

अगर ऐसा कोई रिश्ता टूटता है, तो मर्द को खातून से तलाक की डिक्री हासिल करनी होगी, इसके बाद ही वह दूसरी शादी कर सकता है।

जस्टिस सी एस करनन ने पीर के दिन 2006 के हुक्म में बदलाव करते हुए यह निज़ाम दी। यह मामले कोयम्बटूर के एक परिवार का है, जिसमें निचली अदालत ने कहा था कि खातून के पास इस मर्द से शादी का कोई सुबूत नहीं है, इसलिए उसे मेंटेनेंस देने के लिए नहीं कहा जा सकता।

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