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शाने रसालत सल्लललाहु अलैहि वसल्लम में गुस्ताख़ी मुसलमानों के लिए नाक़ाबिले बर्दाश्त

हैदराबाद 15 दिसंबर: शाने रिसालत सल्लललाहु अलैहि वसल्लम में गुस्ताख़ी के सख्त सजा देने के लिए हुकूमत की तवज्जा मबज़ूल करवाने की ज़रूरत है। मौलाना सय्यद जलालुद्दीन अंसर उमरी अमीर जमाते इस्लामी हिंद ने हुकूमत से मुतालिबा किया के कमलेश तीवारी के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करते हुए उसे सज़ा दी जाये चूँकि मुस्लमान इस अज़ीम हस्ती की शान में क़तई गुस्ताख़ी बर्दाश्त नहीं कर सकते जिस हस्ती ने दुनिया को दैर जहालत के अंधेरों से निकाल कर इन्सानियत का दरस दिया।

उन्होंने मज़हबी पेशवाओं-ओ-रहनुमाओं के ख़िलाफ़ होने वाली बयानबाज़ी और बोहतान तराशियों के ख़िलाफ़-ए-क़ानून की ज़रूरत पर-ज़ोर देते हुए कहा के एक एसे क़ानून की तैयारी पर हुकूमत को तवज्जा दीनी चाहीए जो अज़ीम मज़हबी शख़्सियात की अज़मत को पामाल होने से महफ़ूज़ रखे और इस तरह की गुस्ताख़ियों के मुर्तक़िब अफ़राद को सख़्त सज़ा दिलवा सके।

मौलाना जलालुद्दीन उमरी जमाते इस्लामी हिंद के चार रोज़ा इजतेमा के इख़तेताम पर ज़राए इबलाग़ के नुमाइंदों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि मुल्क की मौजूदा सूरत-ए-हाल इंतेहाई नाज़ुक हो चुकी है और इस सूरते हाल में हुकूमत की ये ज़िम्मेदारी हैके वो आलमी सतह पर हिन्दुस्तान की शबीहा को मुतास्सिर होने से बचाने के लिए ज़रूरी इक़दामात करे।

मौलाना ने हुकूमत बिहार की तरफ से मुकम्मिल नशा बंदी के फ़ैसले का ख़ौरमक़दम करते हुए कहा कि हुकूमते हिन्द बिलख़सूस हुकूमत तेलंगाना को भी इस मसले पर ग़ौर करते हुए शराब से पाक माहौल की फ़राहमी को यक़ीनी बनाने के इक़दामात करने चाहीए। इस मौके पर उनके हमराह मौलाना टी नुसरत अली, मुहम्मद सलीम, हामिद मुहम्मद ख़ान, हाफ़िज़ मुहम्मद रशिदुद्दीन अलावा दुसरे ज़िम्मेदारान जमात मौजूद थे।

मौलाना जलालुद्दीन अंसर उमरी ने वाज़िह किया के ज़ुलम-ओ-ज़्यादती के ज़रीया जन्नत नहीं मिल सकती। जो नौजवान दाश की बेवक़ूफ़ियों का शिकार होते हुए इस राह पर चल रहे हैं वो दरअसल जहन्नुम की तरफ़ जा रहे हैं। वालिदैन और ज़ामाए मिल्लत की ये ज़िम्मेदारी हैके वो इन नौजवानों में शऊर बेदार करें।

अमीर जमाते इस्लामी हिंद ने बताया कि जब अमरीका अपने इत्तेहादी अफ़्वाज के साथ लीबिया, इराक़ और अफ़्ग़ानिस्तान को तबाह करसकता है तो एक मुख़्तसर हिस्से पर क़ाबिज़ गिरोह को तबाह करने से क्युं कतरा रहा है? मौलाना ने बताया कि अमरीका और रूस के दरमियान जारी लफ़्ज़ी जंग भी सियासी चालबाज़ी नज़र आरही है और एसा महसूस हो रहा हैके दोनों ही मुत्तहदा तौर पर मुस्लिम मुमलकतों को मुनक़सिम करते हुए अपने तसल्लुत को बरक़रार रखना चाहते हैं।

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