Tuesday , December 19 2017

शाम में स्कियोरिटी फोर्सेस और अपोज़ीशन ( विपक्ष) में खूँरेज़ लड़ाई, 250 हलाक

ममलकत शाम में हमाह सूबे (प्रांत) के एक गावं में हमले के दौरान 250 से ज़ाइद ( ज़्यादा) अफ़राद ( लोग) हलाक हो गए। शामी अपोज़ीशन ने उसे फ़ौजी कार्रवाई क़रार दिया है जब कि हुकूमत इस के लिए दहशतगर्दों को मौरिद इल्ज़ाम ठहरा रही है। हमाह में फ़्री सी

ममलकत शाम में हमाह सूबे (प्रांत) के एक गावं में हमले के दौरान 250 से ज़ाइद ( ज़्यादा) अफ़राद ( लोग) हलाक हो गए। शामी अपोज़ीशन ने उसे फ़ौजी कार्रवाई क़रार दिया है जब कि हुकूमत इस के लिए दहशतगर्दों को मौरिद इल्ज़ाम ठहरा रही है। हमाह में फ़्री सीरईन आर्मी के एक कमांडर अबू क़मर ने मीडीया को बताया कि सरकारी फ़ौज ने अलतरीमस नामी गांव पर शलबारी कर दी, जिस के नतीजे में 220 अफ़राद मारे गए जबकि 300 से ज़ाइद ज़ख्मी हो गए।

शामी ऑब्ज़र्वेटरी फ़ार ह्युमन राईट्स( Human rights) के बाक़ौल फ़ौज ने इस कार्रवाई में हेलीकॉप्टरों और टैंकों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि सात हज़ार नफ़ूस पर आबाद ये गांव अब मुकम्मल तौर पर ख़ाली हो चुका है, या तो लोग मर गए या वहां से फ़रार हो गए।शामी सरकारी टेलीविज़न ने इस वाक़े ( घटना) की तसदीक़ करते हुए कहा है कि क़तल-ए-आम की इस कार्रवाई के पीछे दहशतगर्दों का हाथ है।

मज़ीद कहा गया कि दहशतगर्दों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए तीन स्कियोरिटी अहलकार भी मारे गए। ऐनी शाहिदीन का दावा है कि सदर बशर अल असद हुकूमत की हामी ( समर्थक) फ़ौज ने गांव में दाख़िल हो कर लोगों को हलाक करना शुरू कर दिया, इलाक़े में मौजूद घरों और मसाजिद को भी नज़र-ए-आतिश कर दिया गया।

फ़्री सीरीइन आर्मी के चीफ़ राद अल असद ने शामी अवाम से अपील की है कि इस क़तल-ए-आम की मुज़म्मत करने के लिए वो आज आम हड़ताल करें। उन्होंने इस कार्रवाई को लर्ज़ा ( घबराहट /काँपता हुआ हुआ) ख़ेज़ जुर्म क़रार दिया है। अगर इस क़त्ल-ए-आम की तसदीक़ ( प्रमाण) हो जाती है तो ये शाम में गुज़श्ता बरस मार्च में शुरू होने वाली बग़ावत का खूँरेज़ तरीन दिन बन जाएगा।

शाम में क़त्ल-ए-आम का ये मुबय्यना ( कथित) वाक़िया ऐसे वक़्त में रौनुमा हुआ है, जब वहां क़ियाम अमन के हवाले से अक़वाम-ए-मुत्तहिदा ( UN) की सलामती कौंसल ने शाम से मुताल्लिक़ ( संबंधित) नई क़रारदाद के मुसव्वदे पर बहस शुरू की है। इस हवाले से आलमी कोशिशें ब दस्तूर तात्तुल ( रुकावट) का शिकार नज़र आ रही हैं।

कौंसल के दो मुस्तक़िल अरकान रूस और चीन शामी सदर बशर अल असद के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के हक़ में नहीं, जबकि अमेरीका, बर्तानिया और फ़्रांस, शाम में तब्दीली चाहते हैं। सदर बशर अल असद के मुख़ालिफ़ ममालिक ( देशों) की क़रारदाद के मुसव्वदे में कहा गया है कि अगर शाम में दस दिन में तशद्दुद ख़त्म ना हो तो फिर इस पर सख़्त पाबंदीयां आइद की जाएं।

अक़्वाम-ए-मुत्तहदा ( UN) की सलामती कौंसल शाम में अपने मुबस्सिर (पारखी) मिशन के मुस्तक़बिल ( भविष्य/ Fuuture)) पर बातचीत के लिए इजलास ( सभा) कर रही है और ये क़रारदाद इस मिशन में तौसीअ की क़रारदाद का हिस्सा होगी।शाम में अक़्वाम-ए-मुत्तहदा के मुबस्सिर मिशन का मैंडियट आइन्दा हफ़्ते के आख़िर में ख़त्महो रहा है।

बर्तानिया ,अमेरीका ,फ़्रांस और जर्मनी ने अपनी मुजव्वज़ा (निश्चित/ तय किया हुआ) क़रारदाद में सदर बशर अल असद के ख़िलाफ़ अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के मंशूर के बाब हफ़तुम के तहत पाबंदीयां आइद करने का मुतालिबा किया है जबकि रूस ने इस की शदीद मुख़ालिफ़त ( विरोध) की है।

दूसरी तरफ़ रूस के नायब वज़ीर-ए-ख़ारजा गीनाडी गीटलोफ़ ने कहा कि अगर ये ममालिक इस क़रारदाद को सलामती कौंसल में वोट के लिए पेश करते हैं तो ये हमारे लिए काबिल-ए-क़बूल नहीं होगी और हम इसको मंज़ूर नहीं होने देंगे। इन का कहना था कि हम क़रारदाद में शाम में अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के मुबस्सिर मिशन की मुद्दत में तौसीअ से मुताल्लिक़ हिस्से की हिमायत करते हैं।

हम मुम्किना क़रारदाद के एक तामीरी मुसव्वदे को तैयारी के लिए काम करेंगे ताकि सूरत-ए-हाल की हक़ीक़ी अक्कासी हो सके।वाज़िह रहे कि रूस और चीन इस से पहले अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की सलामती कौंसल में शाम में ख़ूँरेज़ी रोकने से मुताल्लिक़ क़रारदादों को दो मर्तबा वीटो कर चुके हैं।

दोनों ममालिक शाम में लीबिया की तर्ज़ पर किसी बैरूनी फ़ौजी मुदाख़िलत के मुख़ालिफ़ हैं और उन का कहना है कि शामी हुकूमत और हिज़ब-ए-इख़्तलाफ़ को किसी पेशगी शर्त के बगै़र बातचीत के ज़रीये बोहरान (स‍ंकट) के हल के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

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