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शिक्षक बहाली के लिए नियमों का खयाल रखेगी दिल्ली अकादमिक परिषद्

दिल्ली विश्वविद्यालय के अकादमिक परिषद् ने पर्मानेंट फैकल्टी के रिक्रूटमेंट के लिए यूजीसी रेगुलेशन के तीसरे और चौथे अमेंडमेंट को सैद्धांतिक तौर पर अपनाने का फैसला लिया है. इसके अलावा उन्होंने कमिटी को विश्वविद्यालय के कार्यकलाप देखने की भी भूमिका दी है. हालांकि, शिक्षकों के प्रतिनिधियों का कहना है कि अकादमिक परिषद् ने सारे दस्तावेज देखने की जिम्मेदारी रिविजट कमिटी को दे दी हैं. वे विश्वविद्यालय की जरूरतों के हिसाब से प्रपोजल में बदलाव करेंगे.

दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में जिक्र है – ‘विश्वविद्यालय का अकादमिक परिषद् ने यूजीसी मानक के तीसरे और चौथे बदलाव को जस का तस स्वीकार लिया है. ऐसा उन्होंने जानबूझकर किया है. अब कमिटी विश्वविद्यालय व कॉलेजों के संचालन में भी दखल देगी. अब काउंसिल की अगली बैठक में कमिटी की सिफारिशों का भी पूरा खयाल रखा जाएगा.

गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में पिछले 6 वर्षों से कोई पर्मानेंट शिक्षक बहाली नहीं हुई है. ऐसे में विश्वविद्यालय में 4,000 वैकेंसी हैं. हालांकि, शिक्षकों की संस्था इस बात का विरोध कर रही है. उनका कहना है कि ऐसे बदलाव एड हॉक शिक्षकों को प्रभावित करेंगे. ऐसे में अकादमिक परिषद् के सदस्य रुद्राशीष चक्रवर्ती कहते हैं कि देश के सारे विश्वविद्यालयों को यूजीसी ने ऐसे आदेश जारी किए थे. इस पर दिल्ली विश्वविद्यालय ने विरोध जताया था. यूजीसी इसके तहत विश्वविद्यालयों को रिक्रूटमेंट और प्रमोशन में चौथे अमेंडमेंट को लागू करने की बात कहता है.

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