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शिवराज सरकार जनता का 42 हजार करोड़ रुपये डुबोने की तैयारी में

BHOPAL : 22/03/2010 : Maheshwar Dam___Thank You___Mahim P Singh_Staff reporter_The Hindu_Bhopal

भोपाल। प्रदेश सरकार पर वर्षो से अधूरी पड़ी महेश्वर जल विद्युत परियोजना को पूरा कर एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाना चाहती है। आम आदमी पार्टी (आप) की मध्य प्रदेश इकाई के संयोजक आलोक अग्रवाल ने यह आरोप लगते हुए कहा कि इस परियोजना के शुरू होने से राज्य की जनता की 42 हजार करोड़ रुपये की रकम डूब जाएगी।

 

 

 

गुरुवार को संवाददाताओं से बात करते हुए अग्रवाल ने कहा कि खंडवा जिले में नर्मदा नदी पर एस कुमार्स द्वारा प्रस्तावित महेश्वर परियोजना कई वर्षो से लंबित है। इस परियोजना को शुरू कराने में राज्य सरकार खास दिलचस्पी ले रही है यही कारण है कि शुक्रवार 31 मार्च को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है।

 

 

 

अग्रवाल ने बताया कि नर्मदा नदी पर बनाई जा रही महेश्वर जल विद्युत परियोजना को निजीकरण के तहत 1994 में एस कुमार्स कंपनी को दिया गया था। शुरुआत से ही इस परियोजना पर आरोप था कि इससे बनने वाली बिजली महंगी पड़ेगी। इतना ही नहीं इस परियोजना से प्रभावित होने वाले 60 हजार परिवारों के पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं हुई है।

 

 

 

अग्रवाल ने कहा कि 400 मेगावाट क्षमता की महेश्वर परियोजना की वर्तमान लागत लगभग 6,500 करोड़ रुपये है। इस परियोजना से साल में मात्र 80 करोड़ यूनिट बिजली पैदा होगी और इस बिजली की कीमत करीब 20 रुपये प्रति यूनिट होगी। इससे साफ है कि महेश्वर परियोजना की बिजली की राज्य को जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वहीं जो बिजली इस कंपनी से बनेगी उसे राज्य सरकार को आठ गुना महंगा खरीदना पड़ेगा।

 

 

 

ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी से बिजली खरीदने का सरकार ने समझौता किया है। बिजली नहीं खरीदने पर लगभग 12 सौ करोड़ रुपये प्रतिवर्ष सरकार को निजी परियोजनाकर्ता को देना होगा। यह क्रम 35 वर्ष तक चलेगा। इस तरह 35 वर्ष में बिना बिजली खरीदे 42,000 करोड़ों रुपये मध्य प्रदेश सरकार को कंपनी को देने होंगे।

 

 

 

चौंकाने वाली बात यह है कि महेश्वर परियोजना से एक भी यूनिट बिजली नहीं बनने के बावजूद मध्य प्रदेश विद्युत मंडल 100 करोड़ से अधिक रुपये इस एस्क्रो गारंटी के तहत परियोजना के लिए दे चुका है। अग्रवाल ने कहा कि महेश्वर परियोजना शुरू से ही घोटालों से घिरी रही है।

 

 

इस पर कैग ने भी कई बार सवाल उठाए हैं। वर्ष 2014 की कैग रिपोर्ट में तो समझौता रद्द करने की बात कही गई थी। इतना ही नहीं विद्युत मंडल भी समझौता रद्द करने का चार वर्ष पूर्व नोटिस दे चुका है।

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