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शिवसेना अपनी इलाक़ाई पालिसी से बाज़ आजाए : जय राम रमेश

मर्कज़ी वज़ीर बराए देही तरक्कियात जय राम रमेश ने आज शिवसेना को उसकी अलाक़ाय‌त पर तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए कहा कि मुंबई और बैंगलोर जैसे शहरों की तरक़्क़ी का राज़ यही है कि यहां मुल्क के दीगर इलाक़ों से लोग आकर आबाद हुए जो मुख़्तलिफ़

मर्कज़ी वज़ीर बराए देही तरक्कियात जय राम रमेश ने आज शिवसेना को उसकी अलाक़ाय‌त पर तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए कहा कि मुंबई और बैंगलोर जैसे शहरों की तरक़्क़ी का राज़ यही है कि यहां मुल्क के दीगर इलाक़ों से लोग आकर आबाद हुए जो मुख़्तलिफ़ पेशों के माहिर हैं।

शिवसेना अगर अलाक़ाय‌त की दहाई देते हुए ग़ैर रियासती अव्वाम को निशाना बनाती है तो ये उसकी सब से बड़ी बेवक़ूफ़ी है। मुंबई को लिसानी और इलाक़ाई बुनियाद पर मुल्क के दीगर हिस्सों से अलग थलग नहीं किया जा सकता। अपनी बात जारी रखते हुए उन्हों ने कहा कि तारकीन-ए-वतन कभी कोई मसला ही नहीं रहे और ना ही गुफ़्तगु का मौज़ू रहे बल्कि ये उसी वक़्त मंज़र-ए-आम पर आते हैं जब शिवसेना इस मौज़ू पर शोर-ओ-गुल करती है।

अंदरून-ए-मुल्क एक मुक़ाम से दूसरे मुक़ाम जाने की हर एक को आज़ादी है। अगर इस में रुकावट पैदा की जाती है तो ये समझ लीजिए कि हम तरक़्क़ी की राह में रुकावट पैदा कररहे हैं। यूनेस्को की तसनीफ़ बउनवान सोश्यल अनकलोझ़न आफ़ इंटरनल माईगरेंटस इन इंडिया की लॉंचिंग के बाद अपने ख़िताब के दौरान उन्होंने कहा कि देही इलाक़ों से शहरी इलाक़ों को मुंतक़िल होने की कई वजूहात हैं।

ये कभी लिसानी बुनियादों पर होती है कभी रोज़गार और बक़ा केलिए। लिहाज़ा शिवसेना इन ग़ैर रियासती अफ़राद के ख़िलाफ़ हव्वा खड़ा करती है तो ये उस की ग़लती है। महाराष्ट्रा में शिवसेना और महाराष्ट्रा नवनिर्माण सेना जैसी पार्टियां दीगर रियास्तों से आने वाले लेबर्स को निशाना बनाने केलिए बदनाम हैं खासतौर पर बिहार से आने वालों का अर्सा हयात तंग किया जाता है।

में एक बार फिर कहना चाहता हूँ कि अंदरून-ए-मुल्क एक मुक़ाम से दूसरे मुक़ाम मुंतक़िल होने वाले दरअसल मुल्क का असासा हैं क्योंकि ये लोग अपनी मेहनत और महारत से इस रियासत को तरक़्क़ी बख्शते हैं जहां वो बरसर-ए-कार हैं। उनके अरकान ख़ानदान भी एक ख़ुशहाल ज़िंदगी गुज़ारते हैं।

रमेश ने हाल ही में चेन्नई का भी दौरा किया था जहां उन्होंने देखा कि वहां उडीशा से आए हुए अफ़राद की काबिल लिहाज़ तादाद आबाद है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि कई तमिल शहरी इस बात पर हैरतज़दा थे कि उडीशा के बाशिंदे बेहतरीन मुलाज़मतें कररहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें ख़ुद भी मुलाज़मत करने मुंबई जाना पड़ा तो वो इससे गुरेज़ नहीं करेंगे।

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