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शोबा अरबी उस्मानिया यूनीवर्सिटी में समीनार से मुमताज़ स्कालरज़ का इज़हार-ए-ख़्याल

हैदराबाद ।०४अप्रैल : ( रास्त ) : शोबा अरबी उस्मानिया यूनीवर्सिटी में हिंदूस्तान में अरबी तफ़ासीर पर एक दो रोज़ा समीनार का इनइक़ाद अमल में आया । इस समीनार की सदारत प्रिंसिपल आर्टस कॉलिज मलीश का साल कार ने की । उन्हों ने शोबा अरबी की ह

हैदराबाद ।०४अप्रैल : ( रास्त ) : शोबा अरबी उस्मानिया यूनीवर्सिटी में हिंदूस्तान में अरबी तफ़ासीर पर एक दो रोज़ा समीनार का इनइक़ाद अमल में आया । इस समीनार की सदारत प्रिंसिपल आर्टस कॉलिज मलीश का साल कार ने की । उन्हों ने शोबा अरबी की हालिया तरक़्क़ी और इन्क़िलाबी इक़दामात पर ज़िम्मा दारान की सताइश की और खासतौर पर प्रोफ़ैसर मुहम्मद मुस्तफ़ा शरीफ़ सदर शोबा अरबी की ख़िदमात को ख़िराज-ए-तहिसीन पेश करते हुए कहा कि आप की अनथक कोशिशों से शोबा अरबी यूनीवर्सिटी के चंद गिने चुने नामवर शोबों में शुमार किया जाने लगा है । मेहमान ख़ुसूसी प्रोफ़ैसर सत्य ना रावना वाइस चांसलर उस्मानिया यूनीवर्सिटी ने कहा कि गुज़शता चंद बरसों में डी आर इसके हुसूल के बाद शोबा अरबी की तरक़्क़ी मिसाली है ।

खासतौर पर इस शोबा के ज़िम्मेदारों ने वक़्त की नज़ाकत को समझते हुए इस को असरी तक़ाज़ों से हम आहंग करने का जो बीड़ा उठाया है इस की नज़ीर मिलनी मुश्किल है । उन्हों ने कहा कि ये ख़ुश आइंद बात है कि एक अरबी के मुमताज़ स्कालर को दाइरৃ अलमारफ़ की ज़िम्मेदारी दी गई है उन्हें उम्मीद है कि प्रोफ़ैसर मुस्तफ़ा शरीफ़ की इदारत में ये इदारा अपनी निशात सानिया को दुबारा हासिल करलेगा । उन्हों ने कहा कि शोबा अरबी के ये इन्क़िलाबी इक़दामात दूसरों केलिए भी मशाल राह होंगे । मेहमान एज़ाज़ी डाक्टर ख़ुसरो हुसैनी ने अपने ख़िताब में मुल्तक़ित पर रोशनी डालते हुए कहा कि मुल्तक़ित हज़रत बंदानवाज़ की एक माया नाज़ तफ़सीर है जो सूफियाना तर्ज़ पर लिखी गई है और ये तफ़सीर एक हज़ार आठ सौ सफ़हात पर मुश्तमिल है । इस के दो नुस्खे़ इंडिया ऑफ़िस और नासरिया लाइब्रेरी लखनऊ में हैं ।

इस तफ़सीर की नुमायां ख़ुसूसीयत ये है कि हज़रत बंदानवाज़ ने किसी भी सूरत की तमाम आयतों की तफ़सीर नहीं फ़रमाई बल्कि उन आयात का इंतिख़ाब फ़रमाया जिन से तसव्वुफ़ के मसाइल-ओ-रमूज़ का ताल्लुक़ है । हर मुंतख़ब आयत की तफ़सीर कुछ इस तरह फ़रमाते हैं कि पहले हक़ायक़ , लताइफ़ और आख़िर में मुल्तक़ित के उनवान से ब्यान करते हैं और तफ़सीर महाहम के उसूल पर बंदानवाज़ भी हर सूरा के लिहाज़ से मौज़ू-ओ-महल के लिहाज़ से बिसमिल्लाह की तफ़सीर फ़रमाते हैं इसतरह ये तफ़सीर हुरूफ़ मक़तात की तफ़सीर में भी मुनफ़रद है । मसला खीअस की तक़रीबन आठ या नौ तफ़सीरें ब्यान फ़रमाएं जिस से आपके तबह्हुर इलमी का पता चलता है ।

ज़बान-ओ-ब्यान के एतबार से भी ये तफ़सीर अरबी अदब का शहि पारा है । प्रोफ़ैसर ज़ुबैर अहमद फ़ारूक़ी ने कलीदी ख़ुतबा में हिंदूस्तान में लिखी गई अरबी तफ़ासीर का इजमाली जायज़ा लेते हुए कहा कि हिंदूस्तान में चालीस से ज़ाइद तफ़सीरें लिखी गई हैं जिस में काबिल-ए-ज़िकर अलमलतक़त , काशिफ़ अलहक़ाइक़ , तफ़सीर हाश्मी और सिवा लहा अलाहाद है और आप ने शोबा अरबी की जानिब से इस अहम मौज़ू पर समीनार के इनइक़ाद पर मुबारकबाद पेश की । डायरैक्टर समीनार प्रोफ़ैसर मुहम्मद मुस्तफ़ा शरीफ़ ने ख़ुतबा इस्तिक़बालीया में तमाम मेहमानों का इस्तिक़बाल और शुक्रिया अदा किया और कहा कि शोबा अरबी ने अब तक एमफिल 150 और पी एचडी 71 अता किए हैं ।

हिंदूस्तान में शोबा अरबी ऐसा दूसरा शोबा है जब कि यू जी सी की ख़ुसूसी ग्रांट SAP हासिल है । और इस ग्रांट के ज़रीया शोबा में एक मुस्तक़िल लैंग्वेज लयाब और असरी अदब से लैस लाइब्रेरी का वजूद अमल में लाया गया है इन तमाम कोशिशों का नतीजा ये है कि यहां के तलबा बैन-उल-अक़वामी कंपनीयों और हिंदूस्तान की मशहूर जमिआत में अपनी ख़िदमात अंजाम दे रहे हैं । डाक्टर मुहम्मद फ़ज़ल अल्लाह शरीफ़ की क़िरात कलाम से महफ़िल का आग़ाज़ हुआ ।

प्रोफ़ैसर सय्यद बदी उद्दीन साबरी ने तमाम मेहमानों और मोअज़्ज़िज़ीन का शुक्रिया अदा किया और डाक्टर तलअत सुलताना ने कार्रवाई चलाई ।सी जमातों को तलंगाना पर मौक़िफ़ वाज़िह करने क़तई मोहलत दी जाए ।

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