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शौहर ने वैलेंटाइन डे को तोहफे में दिया किडनी

वैलेंटाइन्‍स डे के मौके पर एक शौहर ने ऐसा तोहफा अपनी शरीक ए हयात को दिया कि जिससे बेहतर शायद ही कुछ और हो. गाजियाबाद की रहने वालीं पूजा तलवार की किडनी पिछले साल से काम नहीं कर रही थी.

वैलेंटाइन्‍स डे के मौके पर एक शौहर ने ऐसा तोहफा अपनी शरीक ए हयात को दिया कि जिससे बेहतर शायद ही कुछ और हो. गाजियाबाद की रहने वालीं पूजा तलवार की किडनी पिछले साल से काम नहीं कर रही थी. ऐसे में नोएडा के एक हॉस्पिटल में एक सर्जरी में उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की गई.

अहम बात यह है कि पूजा के शौहर के आज़ा (Organ) उनसे मैच नहीं हो रहे थे. ऐसे में उन्होंने पूजा की जान बचाने के लिए अपनी किडनी किसी और खानदान को डोनेट कर दी, ताकि स्वॉप ट्रांसप्लांट के जरिये पूजा की जिंदगी बचाई जा सके. ऐसा उस हालात में किया जाता है जब कोई डोनर मैच न होने की वजह से जरूरतमंद शख्स को किडनी नहीं दे पा रहा हो.

ऐसे हालात में किडनी किसी ऐसे ही दूसरे डोनर और जरूरमंद से एक्सचेंज की जाती है, जिनकी मैचिंग आपस में न हो पा रही हो. इस तरीके से दोनों जरूरमंद मरीजों को किडनी मिल जाती है.

पेशे से बिजनेसमैन पूजा के शौहर अरुण तलवार ने बताया कि मैं उसे इस तरह से जूझते हुए नहीं देख सकता था. जब डॉक्टर्स ने मुझे बताया कि एक और 22 साल का मरीज़ इसी परेशानी से जूझ रहा है और उसे बी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप वाली किडनी चाहिए. मैं एक्सचेंज के लिए तैयार हो गया. उसकी वालदा ने मेरी शरीक ए हयात को किडनी दे दी.

इस सर्जरी को अंजाम देने वाले फोर्टिस नोएडा के यूरॉलजी एंड रीनल ट्रांसप्लांट के डायरेक्टर डॉक्टर दुष्यंत नादर ने बताया कि ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि बीवी को बचाने के लिए शौहर अपने आज़ा (Organ) अतिया ( Donate) करे. उन्होंने कहा कि ज़्यादातर मामलों में ख़्वातीन ही अपने आर्गन डोनेट करती हैं. आंकड़े बताते हैं कि ख़्वातीन (ज्यादातर बीवी और मां) ही आर्गन डोनेट करती हैं. दूसरी तरफ बहुत कम ख़्वातीन ट्रांसप्लांट करवाती हैं.

डॉक्टर का कहना है कि दोनों मरीज सर्जरी के बाद बेहतर हालत में हैं. अरुण तलवार कहते हैं कि मैं कुछ भी करने को तैयार था. पिछले पांच महीनों से वह डायलिसिस पर थी. मैंने हर मुम्किन कोशिश की. पूजा कहती हैं कि जान बचाने के लिए वह अरुण की अहसानमंद हैं.

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