Thursday , December 14 2017

श्रीलंका में माही गीरों की गिरफ़्तारी

श्रीलंका की एक एक अदालत ने आज उन 35 मछेरों की रिहाई का हुक्म दिया जो गुजिश्ता माह श्रीलंकाई बहरिया के हाथों गिरफ़्तार करलिए गए थे।

श्रीलंका की एक एक अदालत ने आज उन 35 मछेरों की रिहाई का हुक्म दिया जो गुजिश्ता माह श्रीलंकाई बहरिया के हाथों गिरफ़्तार करलिए गए थे।

खबर‌ के मुताबिक़ गुजिश्ता माह तामिलनाडो रियासत से ताल्लुक़ रखने वाले मछेरों को 25 अगस्त को उस वक़्त गिरफ़्तार करलिया गया था जब वो श्री लंकाई आबी हदूद में दाख़िल होगए थे। महिकमा समक्यात के ओहदेदारों ने बताया कि तमाम मछेरों को पोथा लिम कोर्ट मजिस्ट्रेट के इज्लास पर पेश किया गया जहां से उन्हें रिहाई का हुक्म दिया गया।

मजिस्ट्रेट ने तामिलनाडो के मछेरों के इस्तिमाल में रहने वाली पाँच माही गीरों कश्तियों को मछेरों के हवाले करने का कोई हुक्म नहीं दिया जो श्रीलंकाई बहरिया ने उनके क़बज़े से ज़ब्त की थीं। यहां इस बात का तज़किरा ज़रूरी है कि तामिलनाडो के मछेरों की रिहाई केलिए वज़ीर आला जय‌ ललीता ने हमेशा दिलचस्पी दिखाई।

उन्होंने कभी भी मछेरों की गिरफ़्तारी पर ख़ामूश बैठने को तरजीह नहीं दी बल्कि उन्होंने वज़ीर-ए-आज़म मनमोह सिंह को भी मकतूब तहरीर करते हुए उनसे मछेरों की एसोसीएश‌ण और हुकूमत श्रीलंका के बीच‌ बात चीत की राह हमवार करने की अपील की।
ये बात चीत दरअसल माह दिसम्बर में होने वाली है।

जय‌ ललीता ने अपने मकतूब में तहरीर किया कि श्रीलंकाई बहरिया की जानिब से बार बार तामिलनाडो के मछेरों की गिरफ़्तारी अब तशवीशनाक सूरत-ए-हाल इख़तियार करचुकी है बेक़सूर और गरीब मछेरों को गिरफ़्तार करने स्यान के अहल-ए-ख़ाना फ़ाक़े करने पर मजबूर होजाते हैं क्यों कि माही गेरी ही उन की रोज़ी रोटी है।

लिहाज़ा वज़ीर-ए-आज़म इस बात को यक़ीनी बनाएं कि मछेरों की एसोसीएश‌ण और हुकूमत श्रीलंका के बीच‌ बात चीत का शुरू हो ताकि मछेरे इस मुसीबत से हमेशा केलिए राहत हासिल करसकें।

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