Friday , September 21 2018

संगा रेड्डी के वाकियात पर एहतेजाज ,शहर के वाकियात खामुशी

शहर में जारी फ़िर्का वाराना कशीदगी और वक़फ़ा वक़फ़ा से जारी अमन को बिगाड़ने की कोशिशों के नतीजा में शहरीयों में बे चीनी और ख़ौफ़ का माहौल पैदा होगया है । गंगा जमनी तहज़ीब के इस शहर के हर शहरी की ज़बान पर शहर की सूरत-ए-हाल के ताल्लु

शहर में जारी फ़िर्का वाराना कशीदगी और वक़फ़ा वक़फ़ा से जारी अमन को बिगाड़ने की कोशिशों के नतीजा में शहरीयों में बे चीनी और ख़ौफ़ का माहौल पैदा होगया है । गंगा जमनी तहज़ीब के इस शहर के हर शहरी की ज़बान पर शहर की सूरत-ए-हाल के ताल्लुक़ से ही फ़िक्र-ओ-तशवीश के जुमले पाए जाते हैं और हर शहरी चाहता है कि शहर में अमन क़ायम रहे ।

इसी तरह शहर के बाहर रियासत के दीगर मुक़ामात पर भी हालिया अर्सा में जो फ़िर्का वाराना नौइयत के वाक़ियात और अक़ल्लीयतों की जायदाद-ओ इम्लाक पर मुनज़्ज़म अंदाज़ में जो हमले हुए थे और मुस्लमानों की मईशत को जिस तरह से नुक़्सान पहुंचाया गया था इस के नतीजा में अक़लीयती तबक़ा सब से ज़्यादा ख़ौफ़ और बेचैनी का शिकार है ।

रियासत के दीगर मुक़ामात में हालिया दिनों हुए फ़सादात अब शहर में जारी फ़िर्का वाराना वाक़ियात से मुस्लिम अक़ल्लीयती तबक़ा अदम तहफ़्फ़ुज़ का शिकार हो गया है । इन हालात में हुकूमतों और दीगर सतहों पर मुस्लमानों की कोई नुमाइंदगी भी मोअस्सिर अंदाज़ में नहीं हो पा रही है यही वजह है कि मुस्लमान हुकूमतों से अपने मसाइल के लिए नुमाइंदगी के ताल्लुक़ से भी फ़िक्रमंद होगए हैं।

मुस्लमानों में ये एहसास ज़्यादा शिद्दत से जागुज़ीं होगया है कि शहर हैदराबाद और खासतौर पर पुराने शहर में अक्सरीयती तबक़ा का असर कम होने के बावजूद हर सतह पर उन की नुमाइंदगी बड़े पैमाने पर हो रही है और अक्सरीयती तबक़ा की सयासी जमाअतें अपने अवाम के लिए हर सतह पर नुमाइंदगी करती नज़र आरही हैं और अपने अपने नौजवानों का साथ भी दे रही हैं।

इस के बरख़िलाफ़ हर सतह पर अवामी नुमाइंदगी का दम भरने वाले मुस्लिम नौजवानों और मुस्लिम बिरादरी से अमलन अंजान हो चुके हैं और अपने फ़राइज़ से मुजरिमाना ग़फ़लत बरत रहे हैं। गुज़शता रोज़ बहादुर पूरा इलाक़ा में मस्जिद की बे हुर्मती और इस से कब्ल भी 24 घंटों में तीन मसाजिद में ख़िंज़ीर का गोश्त फेंके के वाक़ियात पर मुस्लिम क़ियादत के दावेदारों की ख़ामोशी पर भी अवाम ने अफ़सोस का इज़हार किया है ।

अक्सर शहरियों ने सिर्फ एक आध मुक़ाम का मुआइना करने और दो चार रस्मी-ओ-रिवायती अलफ़ाज़ की अदाएगी को महज़ ढोंग और दिखावा क़रार दिया है । ये बात भी काबिल-ए-ग़ौर है कि शहर से 50 कीलो मीटर के फ़ासले पर संगारे डी में फ़िर्कावाराना नौइयत के फ़सादात होते हैं तो इस ताल्लुक़ से नुमाइंदगी के बलंद बाँग दावे किए जाते हैं और शोर शराबा किया जाता है ताहम शहर के वाक़ियात पर ख़ामोशी अफ़सोसनाक है ।

चीफ मिनिस्टर से नुमाइंदगी पर भी मुस्लमानों में शकूक पाए जाते हैं कि आया फ़िर्कावाराना वाक़ियात पर कहीं अपने मसाइल तो पेश नहीं कर लिए गए ? । या फिर ओक़ाफ़ी जायदादों की तबाही और लूट खसूट के ज़िम्मेदार एक आनधराई क़ाइद की हिमायत तो नहीं की गई । कहा जा रहा है कि संगारेडी वाक़िया पर जमात के सदर ने एहतिजाज किया

और वहां मुक़ामी रुकन असैंबली और एक मुस्लिम क़ाइद को मौरिद इल्ज़ाम टहराया लेकिन चिराग़ तले अंधेरा के मिस्दाक़ सात अरकान असेंबली रखने वाले रुकन पार्ल्यमंट ने पुराने शहर में ख़ुद अपने ही हलक़ा में फ़िर्कावाराना तशद्दुद पर जमहूरी अंदाज़ में एहतिजाज करना गवारा नहीं किया ।

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