Wednesday , January 17 2018

संघ भी मानने को मजबूर हुआ, वेदों में लिखा था हिंदू भी खाते हैं गोमांस

देश में गोरक्षा और गोमांस से उपजी राजनीति के बीच संघ के मुखपत्र में दावा किया गया है कि वेदों में गोमांस खाने तथा गोकशी की अनुमति है।गोमांस खाने को लेकर विवाद के बीच, RSS के मुखपत्र ‘ऑर्गेनाइजर’ में छपे एक लेख में आरोप लगाया गया कि ब्रितानियों ने इतिहास से ‘छेड़छाड़’ के लिए लेखकों को रखने की ‘गंदी राजनीति’ की।

दरअसल आरएसएस के मुखपत्र आॅर्गनाईजर में प्रकाशित लेख में यह बताया गया है कि वैदिक काल में भी गाय के मांस खाने में और गोकशी पर मनाही नहीं थी। मगर बीफ मसले पर आरएसएस द्वारा कहा गया है कि विवाद की जड़ ब्रिटिश राज की गंदी राजनीति है। जिसमें कहा गया है कि भारत के इतिहास को ब्रिटिश राज द्वारा प्रभावित किया गया।

खबर इंडिया टीवी की रिपोर्ट  में कहा गया कि ब्रितानियों ने लेखकों को इतिहास बदलने के लिए रखा और इसके बदले बड़ी राशि का भुगतान किया।

उधर, मुहर्रम पर दुर्गा की मूर्ति विर्सजन पर ममता बनर्जी सरकार के प्रतिबंध का हवाला देते हुए RSS ने गोमांस खाने और गोकशी विवादों को लेकर असहिष्णुता बढ़ने की बातों पर करारा पलटवार किया और कहा कि हिन्दू धर्म का आधार केवल सहिष्णुता नहीं बल्कि सभी धर्मों को स्वीकारना है।

RSS के मुखपत्र ‘आर्गनाइजर’ में छपे संपादकीय में कहा गया कि बंगाल में धर्मनिरपेक्ष उत्तेजना का एक और दौर चल रहा है जहां ममता बनर्जी नीत राज्य सरकार ने मुहर्रम के कारण राज्यभर में 23 और 24 अक्टूबर को दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध लगा दिया। क्या यह किसी धार्मिक समुदाय की आपत्ति पर किया गया?

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