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संजय का जेल में 4000 रुपय अला, स्टाफ़ ग़मज़दा!

नई दिल्ली , 7 जुलाई (एजैंसीज़) संजय दत्त जो मौजूदा तौर पर पुणे की यरवाडा जेल में अपनी सज़ा भुगत रहे हैं, उन्हें बताया जाता है कि अपनी फ़ैमिली की तरफ़ से माहाना भत्ते के तौर पर लग भग 4000 रुपय हासिल होते हैं। बाअसर ख़ानदान से ताल्लुक़ रखने वाला

नई दिल्ली , 7 जुलाई (एजैंसीज़) संजय दत्त जो मौजूदा तौर पर पुणे की यरवाडा जेल में अपनी सज़ा भुगत रहे हैं, उन्हें बताया जाता है कि अपनी फ़ैमिली की तरफ़ से माहाना भत्ते के तौर पर लग भग 4000 रुपय हासिल होते हैं। बाअसर ख़ानदान से ताल्लुक़ रखने वाला शख़्स जिस के लिए 32 रुकनी स्टाफ़ चौबीसों घंटे और हफ़्ते तमाम ख़िदमत के लिए दस्तयाब रहता है, इस के मददगारों ने जब ये सुना कि इनका आजिर इस क़दर मामूली रक़म पर गुज़ारा कर रहा है तो वो फूट कर रो दिए।

संजय से क़रीबी एक ज़राये ने अख़बार डी एन ए से बात करते हुए इन्किशाफ़ किया कि संजू को (माहाना) एक मनी आर्डर मालियती 4000 रुपय हासिल करने की इजाज़त है। उनकी बीवी मान्यता का भरोसा मंद मददगार महीना में एक मर्तबा पोस्ट ऑफ़िस जाता है ताकि ये रक़्म जेल हुक्काम को भेजी जा सके। इसके इव्ज़ में वो कूपनस संजू को देते हैं जो इनका इस्तेमाल स्टैंपस, लिफाफे, साबुन, टूथ टूथब्रश और दीगर ज़रूरी अशीया की ख़रीदारी के लिए करते हैं।

हर कोई इस हक़ीक़त से वाक़िफ़ नहीं है। एक रोज़ मान्यता अपने बांद्रा फ़्लैट में लंच पर खाने का इंतेज़ार कर रही थी लेकिन खाना सरबराह नहीं किया गया। इस ज़रीया ने मज़ीद कहा, वो अपने बच्चों के साथ काफ़ी देर मुंतज़िर रही और फिर बावरीचीख़ाना गई कि आख़िर ताख़ीर क्यों हो रही है। इस ने देखा कि स्टाफ़ मैंबरस एक दूसरे के क़रीब जमा हो कर सरगोशी कर रहे हैं और बाअज़ की आँखों से आँसू रवां हैं।

जब उन्होंने वजह दरयाफ़त की तो उन लोगों ने उसे बताया कि वो ये जान कर सदमे में मुबतला हैं कि संजू को इस क़दर मामूली रक़्म मिल रही है। संजय के बाअज़ स्टाफ़ मैंबरस को यक़ीन ही नहीं हुआ कि उनके आजिर को माहाना उनसे कहीं कमतर रक़म हासिल हो रही है।

डी एन ए के मुताबिक़ संजय अपनी कुशादा दिल्ली के लिए जाने जाते हैं जैसा कि गुज़िश्ता साल फ़िल्म अग्नी पथ की कामयाबी के बाद उन्होंने अपने हर स्टाफ़ मैंबर को 25,000 रुपय दिए थे। इसके अलावा 53 साला ऐक्टर ने बताया जाता है कि कई ख़ास मौक़ों पर अपने अरकान अमला को 4000 ता 5000 रुपय देते हुए अपनी सख़ावत का मुज़ाहरा किया है।

इस लिए संजय के स्टाफ़ मैंबरस अपने मालिक के मामूली अला के ताल्लुक़ से जान कर जज़बाती होगए। आख़िर-ए-कार संजय की शरीक-ए-हयात मान्यता को मुदाख़िलत करते हुए उन्हें समझाना पड़ा कि जो कुछ रक़्म संजय के लिए मुख़तस हुई वो इसी से काम चलाते हुए मुतमइन हैं। इस के बाद ही संजय के स्टाफ़ ने अपना काम बहाल किया।

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