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संजय दत्त और जैबुन्निसा-ए-माफ़ी के मुस्तहिक़ कोशिश जारी : काटजू

नई दिल्ली 29 मार्च : ऐक्टर संजय दत्त के इस बयान से क़ता नज़र जहां उन्होंने कहा था कि वो रहम की दरख़ास्त नहीं करेंगे प्रेस कौंसिल आफ़ इंडिया के सदर नशीन जस्टिस( रिटायर्ड) मर कंडे काटजू ने कहा कि वो संजय दत्त और993-ए-मुंबई बम हमलों की मुल्ज़िम

नई दिल्ली 29 मार्च : ऐक्टर संजय दत्त के इस बयान से क़ता नज़र जहां उन्होंने कहा था कि वो रहम की दरख़ास्त नहीं करेंगे प्रेस कौंसिल आफ़ इंडिया के सदर नशीन जस्टिस( रिटायर्ड) मर कंडे काटजू ने कहा कि वो संजय दत्त और993-ए-मुंबई बम हमलों की मुल्ज़िमा जैबुन्निसा-ए-की माफ़ी केलिए अपनी कोशिशें जारी रखेंगे

उनसे ये पूछा गया कि संजय दत्त ने माफ़ी केलिए दरख़ास्त ना देने का बयान दिया है तो काटजू ने कहा कि इस से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता । में सदर जमहूरिया और गवर्नर ( महाराष्ट्रा) के पास दरख़ास्तें रवाना कररहा हूँ । उन्होंने कहा कि संजय दत्त और जैबुन्निसा-ए-दोनों ही माफ़ी के मुस्तहिक़ हैं ।

अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि सेमाजी तौर पर संजय दत्त का रोल हमेशा मुसबत रहा है । इंसानी बुनियादों पर भी वो संजय दत्त और जैबुन्निसा-ए-को माफ़ करदिए जाने के ख़ाहां हैं । वैसे तो संजय दत्त की शख़्सियत के कई पहलू हैं जिन पर ग़ौर वख़ोज़ किया जाना चाहिए ।

उन्होंने कहा कि अगर दस्तूर हिंद का हम बग़ौर मुताला करें ख़ुसूसी तौर पर आर्टीकल 72 और आर्टीकल 161 का तो हमें मालूम होगा कि इस में ऐसी कोई बात तहरीर नहीं की गई है कि अपील केलिए किसे दरख़ास्त करनी चाहिए । सैक्शन 72 सदर जमहूरिया को और सैक्शन 161 गवर्नर को ये इख़्तयारात फ़राहम करता है कि वो किसी भी मुल्ज़िम को ( चाहे सज़ाए मौत का सामना करने वाला मुल्ज़िम ही क्यों ना हो) माफ़ी दे सकते हैं ।

काटजू ने कहा कि संजय दत्त की माफ़ी के लिए उन्होंने ऐक्टर से बगै़र तबादला-ए-ख़्याल किए ही अपील दाख़िल की है । संजय दत्त ने मुझ से कोई राबिता क़ायम नहीं किया और ना ही मैंने उनसे बात की है । ये सारे काम उनकी ( संजय दत्त ) लाइलमी में किए जा रहे हैं । 70 साला जैबुन्निसा-ए-को भी पाँच साल की सज़ाए क़ैद सुनाई गई है ।

पहले पहल संजय दत्त का सेमाजी बाईकॉट किया गया था डेढ़ साल की सज़ा काटने के बाद इनका फ़िल्मी कैरियर मुतज़लज़ल होगया था जिसे बहाल करने केलिए उन्हें पाँच ता छः साल का अर्सा लग गया कोई प्रोडयूसर उन्हें अपनी फ़िल्म में कास्ट नहीं करता था बैंक लोन नहीं दिया जाता था और बैरून-ए-मुल्क सफ़र केलिए हमेशा अदालत की इजाज़त लेनी पड़ती थी।

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