संजू बाबा का हुआ बुरा हाल, पढ़ी हनुमान चालीसा

संजू बाबा का हुआ बुरा हाल, पढ़ी हनुमान चालीसा
मुंबई, 18 मई: 1993 के मुंबई ब्लास्ट से जुड़े मामले में मुजरिम करार अदाकार संजय दत्त को आर्थर रोड जेल की सख्त सेक्युरिटी वाली अंडा सेल में रखा गया है।

मुंबई, 18 मई: 1993 के मुंबई ब्लास्ट से जुड़े मामले में मुजरिम करार अदाकार संजय दत्त को आर्थर रोड जेल की सख्त सेक्युरिटी वाली अंडा सेल में रखा गया है।

इसी सेल में मुंबई हमले के गुनहगार पाकिस्तानी दहशतगर्द अजमल कसाब को रखा गया था। जुमेरात को टाडा कोर्ट में खुदसुपुर्दगी के बाद जेल की इस सेल में संजय की पहली रात भारी बेचैनी और घुटन में कटी।

वह सो भी नहीं सके। परेशान संजय ने अब टाडा अदालत से उन्हें दूसरी सेल में शिफ्ट करने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि वह कोई दहशतगर्द नहीं हैं, जो उन्हें सेल में डाल दिया गया है।

संजय दत्त के वकील रिजवान मर्चेंट ने जुमे के दिन टाडा कोर्ट में ज़ुबानी अपील की कि संजय को अंडा सेल की बजाय जेल की किसी और सेल में रखा जाए।

अंडा सेल में हवा और रोशनी का इंतेज़ाम नहीं है, जिससे संजय को वहां भारी घुटन महसूस हुई। मर्चेंट ने कहा कि अंडा सेल में आम तौर पर दहशतगर्दों और खूंखार मुजरिमों को रखा जाता है।

सेक्युरिटी के मद्देनजर उन्हें दूसरे कैदियों से अलग रखा जाता है। वकील ने अदालत से कहा कि संजय को टाडा कानून के तहत मुजरिम नहीं पाया गया है, उन्हें Arms act के तहत सजा सुनाई गई है। वह दहशतगर्द नहीं हैं। ऐसे में उन्हें अंडा सेल में नहीं रखा जाना चाहिए।

इस पर टाडा जज जीए सनप ने वकील को लिखित दर्खास्त दाखिल करने को कहा है। ताकि वह इस पर प्रासीक्यूटर्स का रुख जानने के बाद कोई हुक्म जारी कर सकें। संजय दत्त को अभी साढ़े तीन साल की सजा काटनी है। हालांकि महाराष्ट्र की हुकूमत ने अभी यह फैसला नहीं किया है, उन्हें आर्थर रोड जेल में ही रखा जाए या किसी और जेल में मुंतकिल किया जाए।

माना जा रहा है कि उन्हें पुणे की यरवदा जेल भेजा जाएगा।

जेल आफीसरों के मुताबिक संजय दत्त को जुमेरात को घर का बना खाना दिया गया और रात में पीने के लिए पानी की बोतल भी दी गई। उन्होंने रात में मज़हबी किताब पढ़े। संजय अपने साथ हनुमान चालीसा, गीता और रामायण जेल ले गए हैं। उन्होंने जुमे की सुबह कसरत की। हालांकि वह बेचैन दिखे।

संजय दत्त को जेल में काम भी करना होगा। ज़राए के मुताबिक उन्हें कारपेंटर, बुनकर, खेती या बेकरी में कोई काम चुनना होगा। पिछली मर्तबा जब संजय 18 महीने पुणे की यरवदा जेल में रहे थे, तब उन्होंने कुर्सियां बनाने का काम किए थें।

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