संतो को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने को लेकर बढ़ रहा विवाद, खुद संत कर रहे हैं विरोध

संतो को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने को लेकर बढ़ रहा विवाद, खुद संत कर रहे हैं विरोध
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शिवराज सरकार द्वारा 5 बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं विपक्ष को तो बैठे बिठाएं मुद्दा भी मिल गया है। ताजा घटनाक्रम में शिवराज सिंह चौहान के इस फैसले पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने सवाल उठा दिया है। उन्होंने सरकार के इस कदम को स्वार्थ से परिपूर्ण बताया।

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि शिवराज सरकार उन लोगों को यह पद देती है जो सम्मानजनक होते हैं और जो लोगों की आध्यात्मिक तौर पर मदद करते हैं। लेकिन इस सरकार ने अपने निजी हित की वजह से उन लोगों को यह पद दिया है जिन्हें लोग जानते तक नहीं हैं । यह गलत है और नहीं होना चाहिए।

मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कंप्यूटर बाबा सहित पांच संतों को राज्यमंत्री पद का दर्जा देकर नए विवाद को जन्म दे दिया है। कांग्रेस इस फैसले को लेकर शिवराज सरकार पर लगातार हमलावर है। इस फैसले के बाद से सरकार और सीएम के फैसले पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

इन पांचों संतों ने शिवराज सरकार द्वारा पिछले साल नर्मदा किनारे लगाए गए पौधों और अन्य विकास कार्यों को लेकर घेरा था। सरकार पर आरोप मढ़ते हुए ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ शुरू करने का एलान भी किया था।

अब पद की मिलने के बाद इन्होंने अपनी पूर्व की घोषणा से कदम पीछे खींच लिए हैं। इस वजह से विपक्ष शिवराज सरकार पर हमलावर है और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने इसे स्वार्थ भरा फैसला बताया।

सरकार के इस फैसले के खिलाफ रामबहादुर शर्मा नाम के एक शख्स की ओर से हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में एक याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। इतना ही नहीं फैसले के कारण बाबाओं के रुख में बदलाव पर भी सवाल खड़े किए है।

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